राजनीति

प्रधानमंत्री विदेश तो कुशवाहा की 30 तारीख का क्या होगा?

अब तेरा क्या होगा ……. कल 30 नवंबर अर्थात उपेंद्र के अल्टीमेटम की आखिरी तारीख। प्रधानमंत्री विदेश में हैं और 2 नवंबर को स्वदेश लौटेंगे। अमित शाह से मिलने में तीसरी बार विफल उपेंद्र कुशवाहा ने 30 नवंबर तक का अल्टीमेटम देते हुए भविष्य में सिर्फ प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी से बात करने का ऐलान किया […]

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तीन राज्यों में सरकार चाहे बचे, लेकिन तिलिस्म टूटेगा

                           ** बी बी रंजन  पांचों राज्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तिलिस्म टूटेगा। मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ का चुनाव परिणाम लोकसभा के लिए जनमत संग्रह तो नहीं, लेकिन चुनावी दंगल की गंभीर झांकी होगी। भाजपा को जीत मिल सकती है, लेकिन नमो और […]

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चेहरे की कंगाली के मुगालते में न रहे भाजपा

देश में महागठबंधन बना तो एनडीए के लिए 2019 आसान नहीं होगा। हिंदू लहर का सुनामी बने या न बने, लेकिन भाजपा की इस कोशिश से अस्तित्व तलाशती विपक्षी दलों के सामाजिक समीकरणों का महागठबंधन बन जाएगा।  मुगालते में नरसिम्हा राव की सरकार बनी थी, वाजपेई की शाइनिंग इंडिया और गुड फील की सरकार चली […]

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राम की शरण में चौकीदार या हारे को हरिनाम

न खाऊंगा, न खाने दूंगा के नारे के बीच कई लोगों ने छककर खाया, कुछ लोग बांधकर परदेश भी लेते गए और हमारा चौकीदार हाथ मलते रह गया। अब हिंसक हालात से 2019 फतह की तैयारी: बी बी रंजन मंदिर तो अभी नहीं बनेगा, अध्यादेश और बिल की बातें भी बेमानी है, लेकिन ‘हारे को […]

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मंदिर निर्माण की फेकू राजनीति

                   – ** बी बी रंजन राम मंदिर पर प्रपंची बिल से विपक्ष को मंदिर-विरोधी और फिर हिन्दू विरोधी स्वरूप दिया जाएगा, जिससे लोकसभा चुनाव में हिंदुत्व की उतावली सनक बनेगी। केंद्र सरकार के बस में न अयोध्या में मंदिर निर्माण का अध्यादेश है, न कानून बनाने […]

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सबरीमाला विवाद: दलों के स्वार्थी और बौद्धिक दिवालियापन का प्रतिफल

                           —  ** बी बी रंजन समाज-परिवर्तन का बुनियादी काम महापुरुष करते हैं। बौद्धिक रूप से दिवालिया छुटभैये नेताओं के लिए तो कुर्सी ही ब्रह्म है, सत्ता के मार्गों की प्राप्ति ब्रह्मज्ञान है। केरल के सबरीमला मंदिर में रजस्वला औरतों के प्रवेश को […]

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नमो की डुगडुगी पर थिरकते लोग बिलखने लगे

2014 में नरेंद्र मोदी की डुगडुगी पर थिरकती मानसिकता 2018 तक सिहरने लगी है। नरेंद्र मोदी की बर्बादी और बदनामी की स्क्रिप्ट जेटली, अधिया, राकेश अस्थाना, भरतलाल की गुजराती लॉबी ने लिखी। पद और अभूतपूर्व समर्थन के प्रमाद से उपलब्धियों की उम्मीद को गहरा आधात लगा है। मजमा इकट्ठा करना आसान होता है, लेकिन मुश्किलों […]

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क्यों घबड़ा गई भाजपा ?

क्या छत्तीसगढ़ को छोड़ अन्य राज्यों में पछाड़ खाकर गिरने की अंदुरुनी खबर से भाजपा को पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम के पूर्व सीटों पर सहमति की सद्बुद्धि आयी? या प्रशांत किशोर के महागठबंधन के संपर्क में लगातार बने रहने से घबरा गयी भाजपा? क्या मध्यप्रदेश और राजस्थान की निराशाजनक हालत के बाद सीबीआई, राफेल […]

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किस व्यवस्था का नाम भारत है

किस व्यवस्था का नाम है भारत?  सत्ता और पावर की गुंडई, मवालीपन और लंपटगिरी से एमजे अकबर जैसे प्रतीकात्मक लोगों की नजरें हर चौराहे पर असंख्य महिलाओं को हवस के नशे में भेदती हैं। यह समाज के नैतिक पतन का प्रमाण है, आधी आबादी के जीवन का खौफनाक मंजर है,  नारी सशक्तिकरण और ‘बेटी बचाओ, […]

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पहले 5 राज्यों के चुनाव, फिर 4 राज्यों की सीटों पर सहमति

भाजपा बिहार, झारखण्ड, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र में सीटों पर अंतिम सहमति पाँच राज्यों के चुनाव के बाद ही देना चाहेगी। ऐसे शिवसेना भाजपा की मज़बूरी है और महाराष्ट्र में गठबंधन भी जरुरी है।  यूपी और झारखण्ड में भी कुछ दलों को मनाना है। बिहार में भाजपा के लिए कुशवाहा भरोसेमंद और बहुत जरुरी नहीं […]