22 लोगों की गवाही पूरी कर 22 वर्षों के बाद कोर्ट का फैसला आया है: बी. बी. रंजन.

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 क्या आप संतुष्ट हैं? मैं तो स्तब्ध हूँ: बी. बी. रंजन.


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आज अपराध की दुनियां से राजनीति में पैर जमानेवाले प्रभुनाथ सिंह की सजा पर चाय-पान की दुकानों और चौक-चौराहों पर लोकतांत्रिक बहस जारी है. हम साढ़े चार वर्षों तक इसी तरह दुकानों और चौराहों पर, गलियों और बाजारों में, बसों और ट्रेनों में लोकतांत्रिक होते हैं और शेष बचे छह चुनावी महीनों में बाहुबलियों, भ्रष्टाचारियों, धनबलियों और शराब परोसने वालों की वफादारी में गैरलोकतांत्रिक बन जाते हैं. इसलिए पीके शाही जैसे शख्सियत को भारी मतों से मात देकर प्रभुनाथ सिंह जैसे आपराधिक छवि के गैर लोकतांत्रिक लोग भी चुनाव जीतते हैं, 22 वर्षों बाद आये फैसला के अभी कई पड़ाव बाकी हैं: बी. बी. रंजन.

अशोक सिंह की हत्या के साजिशकर्ताओं और हत्यारों की जानकारी सबों को हो गयी थी, लकिन 22 लोगों की गवाही पूरी कर 22 वर्षों के बाद कोर्ट का फैसला आया है. अब तक प्रभुनाथ सिंह अपनी सफल राजनीतिक पारी खेल चुके हैं. लालू-नीतीश के चहेते प्रभुनाथ सिंह को शहाबुद्दीन से टकराने में देर नहीं लगती थी. प्रभुनाथ सिंह के भय से उनके क्षेत्र में पदस्थापित अधिकारी पूर्व में प्रताड़ित अधिकारियों की दास्ताँ सुनकर ‘येस बॉस’ की भूमिका में कार्य करते थे. चुनावी दंगल में उनके खिलाफ ताल ठोकनेवाले अशोक सिंह की दुनियां से विदाई हो गयी. मुझे इस फैसले की उपयोगिता समझ में नहीं आयी, क्योंकि आज भी जनता ऐसे लोगों के संरक्षकों के प्रति समर्पित है, उनका जनाधार बेअसर है.
बिहार की राजनीति में शहाबुद्दीन के 'युवा' कदममशरख से राजनीतिक पारी शुरू करनेवाले प्रभुनाथ सिंह के खिलाफ कई आपराधिक मामले रहे हैं, लेकिन उन्हें पहली बार दोषी करार दिया गया हैं. सजा 23 मई को मुक़र्रर होनेवाली है और फिर ऊपरी अदालत का लम्बा लफड़ा अभी बाकी है. एक लाख मामलों पर एक न्यायाधीश की दौर में हत्या जैसे संगीन जुर्म पर सर्वोच्च न्यायालय तक का फैसला आते-आते प्रभुनाथ सिंह अपनी मंजिल पूरी कर चुके होंगे. लालू प्रसाद और नीतीश कुमार जैसे सामाजिक न्याय के पुरोधा और न्याय के साथ विकास के दावेदार सत्ता में विराजमान है.
कांड संख्या 418/97 के तहत अशोक सिंह की पत्नी चांदनी सिंह की ओर से उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका के बाद अशोक सिंह हत्या मामले की सुनवाई को पटना से हजारीबाग कोर्ट में स्थानांतरित किया गया था. चांदनी सिंह पटना में राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण निष्पक्ष सुनवाई को लेकर चिंतित थीं.
22 वर्षों बाद आये फैसला के अभी कई पड़ाव बाकी हैं. आज अपराध की दुनियां से राजनीति में पैर जमानेवाले और पीके शाही जैसे शख्सियत को भारी मतों से चुनावी मात देनेवाले प्रभुनाथ सिंह की सजा पर चाय-पान की दुकानों और चौक-चौराहों पर लोकतांत्रिक बहस जारी है. आज साजिशकर्ताओं और हत्यारों की जानकारी सबों को हो गयी थी, लकिन 22 लोगों की गवाही पूरी कर 22 वर्षों के बाद कोर्ट का फैसला आया है. अब तक प्रभुनाथ सिंह अपनी सफल राजनीतिक पारी खेल चुके हैं. लालू-नीतीश के चहते प्रभुनाथ सिंह को शहाबुद्दीन से टकराने में देर नहीं लगती थी. प्रभुनाथ सिंह के भय से उनके क्षेत्र में पदस्थापित अधिकारी पूर्व में प्रताड़ित अधिकारियों की दास्ताँ सुनकर ‘येस बॉस’ की भूमिका में कार्य करते थे.चुनावी दंगल में उनके खिलाफ ताल ठोकनेवाले अशोक सिंह की दुनियां से विदाई हो गयी.
मशरख से राजनीतिक पारी शुरू करनेवाले प्रभुनाथ सिंह कके खिलाफ कई आपराधिक मामले रहे हैं, लेकिन पहली बार दोषी करार दिए गए हैं. सजा 23 मई को मुक़र्रर होनेवाली है और फिर ऊपरी अदालत का लम्बा लफड़ा अभी बाकी है. एक लाख मामलों पर एक न्यायाधीश की दौर में हत्या जैसे संगीन जुर्म का सर्वोच्च न्यायालय तक का फैसला आते-आते प्रभुनाथ सिंह अपनी मंजिल पूरी कर चुके होंगे.
लोकतान्त्रिक बहस साढ़े चार वर्षों तक चलेगी, लेकिन जब छह चुनावी माह बचेगें तो प्रभुनाथ सिंह सरीखे लोगों के पक्ष में भीड़ अपना जलवा बिखेरेगी और प्रभुनाथ सिंह सरीखे लोग चुनाव जीतेंगे.

 

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