राजनीती

सोमनाथ की घटना हिंदू राजनीति की मूर्खता की हद

हद कर दी आपने

 

Image result for narendra modi in gujarat campaign 

गैर-हिंदू के रजिस्टर में अहमद पटेल के साथ राहुल गांधी का नाम लिख देने से बवाल मचा है। स्वतन्त्र भारत की बागडोर हिन्दू प्रधानमंत्री को सौंपने की गांधी-नेहरू की सोच के पीछे आजादी को सच्चे अर्थों में प्राप्त करने की मानसिकता थी। इस उद्देश्य से ही जिन्ना को हासिये पर किया गया था। 

 

गुजरात का चुनाव महज नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और हार्दिक पटेल के इर्द-गिर्द घुमता नजर आता है। हार्दिक पटेल ने राजकोट की सभा से अपनी ताकत का एहसास कराया है। इसलिए गैर-हिंदू के रजिस्टर में अहमद पटेल के साथ राहुल गांधी का नाम लिख देने से बवाल मचा है। नरेन्द्र मोदी ने एक हिंदू को को गैर हिन्दू और उसके नाना को मंदिर विरोधी बताकर गुजरात चुनाव को नै रंग देने की कोशिश की है! सोमनाथ की घटना हिंदू राजनीति की मूर्खता की हद है। राहुल गांधी मंदिरों में पूजा-अर्चना कर अपनी हिन्दू छवि को स्थापित करना चाह रहे हैं और भाजपा उन्हें हिन्दू और मंदिर विरोधी करार देने की रणनीति पर कार्य कर रही है। भाजपा अपनी पार्टी को हिन्दू मतों की एकमात्र अधिकारी घोषित करने की नीति चला रही है।

बकौल नरेन्द्र मोदी सोमनाथ का मंदिर नेहरू के विरोध के बावजूद पटेल के सहयोग और समर्थन से बन पाया था, लेकिन बगैर कैबिनेट की मंजूरी के एक गृह मंत्री के बूते ऐसे कार्यों को मूर्त रूप लेना संभव नहीं दिखता। इस दृष्टिकोण से देखें तो प्रधानमंत्री की रजामंदी के बिना सोमनाथ के मंदिर का निर्माण संभव नहीं दिखता। पंडित नेहरू की अध्यक्षता की केबिनेट बैठक में ही सरदार पटेल ने प्रस्ताव रखा था और उसे केबिनेट ने मंजूरी दी थी। क्या इस मंजूरी में नेहरू की सहमति नहीं थी?

सच्चे अर्थो में आजादी का अर्थ भारत की सत्ता को हिन्दू प्रधानमंत्री के हाथों सौंपने की अनिवार्यता से अभिभूत थी और इसी आशय पर कार्य करते हुए ही जिन्ना को भारत की बागडोर नहीं सौंपी गयी थी। फलतः भारत-पाक का विभाजन हुआ था। नेहरू ने समाजवाद और धर्मनिपरेक्षा के जुमलों पर राजनीति की लेकिन फूलपुर के चुनाव में अपने पोस्टर में नाम के आगे पंडित छपवाते रहे। यज्ञ कराने में रुचि रखनेवाले नेहरू की अस्थियाँ उनकी इच्छा के अनुरूप गंगा में प्रवाहित की गयीं थीं।

इंदिरा गांधी भी हिंदू धर्म और कर्म में भरोसा रखतीं थीं लेकिन केदारनाथ मंदिर के सामने मोदी की भक्ति की तरह कोई दिखावा का उदाहरण नहीं मिलता।  राजीव गांधी ने अयोध्या में मंदिर का ताला खुलवाया था। नेहरू के वक्त बाबरी मसजिद में मूर्तियां रखी गई, राहुल गांधी- अरूण नेहरू ने अदालत से अयोध्या में ताला खुलवाया और मंदिर की नींव का शिलान्य़ास भी होने दिया, कांग्रेसी प्रधामंत्री नरसिंहराव के शासनकाल में मस्जिद को गिराया गया।

हिंदू होना मन की बात है। सावरकर पूजा पाठ नहीं करते थे, मगर घोर हिंदुत्ववादी थे। गांधी रामधुन के साथ कुरान की आयते पढ़वाते थे और मंदिरों में नहीं जाते थे तो क्या वे हिन्दू नहीं थे?

भाजपा ने चुनावी जीत के लिए पूरी कांग्रेस पार्टी को गैर हिन्दू बना दिया। राहुल के सोमनाथ दर्शन पर गुजरातियों को भड़काने की कवायद किसी भी सूरत में काबिल-ए-तारीफ़ नहीं है।नरेन्द्र मोदी का एसा बयान उनकी एतेहासिक जानकारी को कटघरे में खड़ा कर गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *