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सवर्णों के मसले पर सारे राजनेताओं की आँखें बंद हैं

मानों, ऊधर देखना मना है :बी. बी. रंजन

Image may contain: 1 person, glassesविवेकशील होने का दंभ पालनेवाले सवर्णों की समझ को लकवा मार गया है। सेकुलरिज्म का राग अलापनेवाले इन सवर्णों को बेवस मतदाता भर मान लिया गया है। दलित लाइन पर चलनेवाली भाजपा पिछड़ों के लिए चिंतित है, लेकिन सवर्ण हासिये पर हैं सवर्णों की मृत जागरूकता और कुंठित स्वाभिमान में जान फूंकने की जरूरत है, उनकी मानसिक अमीरी के भ्रम को झकझोरने की जरूरत है, सत्ता में दमदार भागीदारी के मिथक को तोड़ने की जरूरत है।

Image may contain: 1 personआपके तिरष्कार के लिए दोषी कौन है? निश्चित रूप से आप, क्योंकि आप अपने हितों के प्रति सजग नहीं, आप अपनी मांगों के पीछे अडिग नहीं। आप तो बिन मांगे समर्थन देने के आदि हैं, चाय-पान की दूकानों पर व्यर्थ में हवाबाजी की ठेकेदारी ले बैठे हैं। आखिर दबंग होने का खोखला भ्रम जो अब तक कायम है। इस भ्रम पर पूर्णविराम की जरूरत है: …और हमारे सवर्ण नेताओं को सवर्णों की मांगों पर बोलने में कंपकंपी आती है। लम्बे समय से देश में सवर्णों के लिए असहिष्णुता का दौर है।
Image may contain: 2 peopleसवर्णों के मतों पर एकाधिकार समझनेवाली भाजपा सवर्णों की समस्याओं पर बोलने से कतराती है। दलित या पिछड़ी जाति के हितों पर गर्जना करनेवाले सवर्ण नेता सवर्णों के वाजिब मसलों को उठाने से परहेज करते हैं। दलिओं के पक्ष में सवर्ण नेता बोलते हैं, लेकिन दलित या पिछडी जाति के नेता सवर्णों की उपेक्षा पर मूकदर्शक बने रहते हैं। कई दलित नेता जनाधार की लालसा में सवर्णों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग कर चटकारे लेते हैं। सामाजिक न्याय की बात करनेवाले पिछड़ी जाति के अनर्गल प्रलाप करनेवाले कई बड़बोले नेता सवर्णों के प्रति अपमानजनक बयानों की झड़ी लगा देते हैं।
सवर्णों की हत्याओं को नजरअदाज किया जाता है, उनकी उपेक्षा को जायज ठहराया जाता है, उनके अपमान पर तालियाँ बजतीं हैं, उनके शोषण को सामाजिक न्याय कहा जाता है।

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