राजनीति

संसद में रामकृपाल के सवाल में कितना दम

नहरों के पुनरुद्धार पर सदन में सांसद रामकृपाल यादव का सवाल सराहनीय है, बेशक धन्यवाद के पात्र हैं, लेकिन परिणाम की जरूरत है अन्यथा रेलवे लाइन, पालीगंज में शौचालय निर्माण और डॉ संजीवधारी जैसे मसले आज भी अनुत्तरित हैं। मीसा भारती का संभवतः पालीगंज से कोई लेना-देना नहीं क्योंकि उन्हें मत पिता की हैसियत और जातीय समर्थन पर मिलते हैं, लेकिन पालीगंज में केंद्रीय विद्यालय के निर्माण को लेकर तत्कालीन मंत्री कांति सिंह का बयान शायद आपको याद होगा।

सदन में सांसद ने सवाल उठाया है, लेकिन योजना की स्वीकृति और बजट में प्रावधान तक सजगता जरूरी है। सवालों के पीछे सांसद को पड़ना होगा, अन्यथा ऐसे कई सवाल निरुत्तर रह गए। दरअसल किसानों की समस्याओं का समाधान सवालों के बाद परिणामों की प्राप्ति से होता है। ऐसे यह सांसद की अच्छी पहल है। समस्या का निराकरण हुआ तो सफल प्रयास माना जायेगा। यह किसानों के कल्याण से जुड़ा बड़ा मुद्दा है और किसान महापंचायत ने इसे मज़बूती से उठाया है।

रेलवे लाइन और डॉ संजीवधारी सिंहा की लीबिया से रिहाई प्रकरण को पालीगंज एक्सप्रेस ने मजबूती से उठाया था और तत्कालीन मंत्री ने समाधान की पब्लिसिटी भी की थी, लेकिन परिणाम सिफर रहा था। तब बिहटा में जश्न मनाए गए थे, सड़कों पर नारेबाजी हुई थी।

पालीगंज में शौचालय-निर्माण का मुद्दा भी पालीगंज एक्सप्रेस ने खूब उठाया था। शौचालय-निर्माण की शुरुआत का इश्तिहार भी सांसद के एक शुभचिंतक ने चलाया था, लेकिन परिणति आप बेहतर जानते हैं। दरअसल भारत में कार्यों के लिए सवाल, योजना की स्वीकृति, बजट में प्रावधान, शिलालेख और कार्यारंभ मायने नहीं रखता। कार्य की गुणवत्ता और समाप्ति भरोसा जता जाता है, वरना अधूरे आश्वासनों की लंबी फेहरिस्त है। देश में कार्य-संस्कृति नहीं है।

बहरहाल इस बड़े मसले पर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराने को लेकर सांसद बेशक धन्यवाद के पात्र हैं।

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