लालू और नीतीश ने चौपट किया स्वास्थ्य: बी. बी. रंजन.

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अब नहीं होगा सुधार. शायद स्वास्थ्य सुशासन का हिस्सा नहीं.


Photo: ANI



पूर्णिया में एक महिला का शव मोटरसाइकिल पर रखकर घर ले जा रहे दो व्यक्ति की तस्वीर, मुजफ्फरपुर में कचरा ढोने वाली गाड़ी में एक शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जा रहे स्वच्छता कर्मी की तस्वीर, बेगुसराय में सड़क दुर्घटना में मारी गयी भूटान की महिला पेमा की पोस्टमोर्टेम को रखी गयी लाश को खाते कुत्तों की तस्वीर और कटिहार में एम्बुलेंस के अभाव में प्लास्टिक में अपने रिश्तेदार के शव को पोस्टमोर्टेम के लिए लाते परिजनों की तस्वीर बिहार की स्वास्थ्य सेवा से हमारा साक्षात्कार करातीं हैं।



हर बार इन तस्वीरों के प्रकाशन के बाद कुछ अधिकारियों को हटाया गया, कुछेक स्वास्थ्यकर्मी दण्डित हुए और सरकार कर्तव्यनिष्ट होने का प्रमाण पा गयी। सुशासित सरकार का पाप गहरा है, कृत्य अक्षम्य है, नीचे से ऊपर तक के लोगों को बचाने का कुचक्र जारी है। 

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1990 से अर्थात् पिछले 27 वर्षों से बिहार में लगातार स्वास्थ्य बर्बाद होता रहा है। नीतीश स्टाइल में लगभग स्वास्थ्य ठेके पर बहाल है और अस्पतालों की गुणवत्ता खास्ताहाल है। स्वास्थ्य पूरी तरह निजी हाथों में जा चुका है और गरीब लोग ही सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं 

Body on motorcycle

बिहार में बदहाल स्वास्थ्य में की पूरी जबाबदेही लालू प्रसाद और नीतीश कुमार की है। केरल के सरकारी अस्पतालों में अपार भीड़ है और गुणवत्ता ऐसी कि वहां निजी अस्पतालों की संख्या काफी कम है। दूसरी ओर बिहार के सरकारी अस्पतालों में प्रायः अब वैसे ही लोग जाते हैं, जो प्राइवेट स्कूल की फीस अदा नहीं कर सकते। सरकारी अस्पतालों में गरीब और वंचित समाज के बच्चे हैं। सामाजिक न्याय की सरकार स्वास्थ्य माफिया के भारी भुगतान तले साष्टांग है। राजनीतिक लाभ के समक्ष सामाजिक न्याय बकवास है।

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