राजनीति

योगी राज में ठाकुरों के बढ़ते मनोबल से व्यथित ब्राह्मणों की गोलबंदी में जुटीं माया: बी. बी . रंजन

 

17 दलों का जमावड़ा तो हुआ, लेकिन विपक्षी दलों की एकजुटता को लेकर सोनिया गांधी के आमंत्रण पर वामपंथी और बसपा शामिल नहीं हुए। सपा के रामगोपाल यादव बैठक में आये, लेकिन अखिलेश यादव ने भविष्य में कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना को खारिज किया। तृणमूल ने ब्रायन के रूप में अपना प्रतिमिधि तो भेजा, लेकिन लोकसभा उपचुनाव में तृणमूल को मिली जीत और भाजपा की शिकस्त से उत्साहित ममता बनर्जी आगामी संसदीय चुनाव में 45 सीटों पर जीत के आकलन के साथ तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने का सपना देख रहीं है। उनकी यह सोच उनके अंदर विपक्षी गठजोड़ का प्रधानमंत्री बनने की संभावना दिखा गया है।
मायावती भी दलितों के अंदर भाजपा के प्रति विरोध का भाव देखतीं हैं। योगी राज में ठाकुरों के बढ़ते मनोबल से ब्राह्मणों में विरोधी स्वर बनने लगे हैं। मायावती इस विछोभ का लाभ लेकर एक बार फिर ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम कॉम्बिनेशन की संभावना देख रहीं हैं और अगली बार अपने बूते सत्ता पाने की उम्मीद से लबरेज हैं। इसलिए उन्होंने अखिलेश और कांग्रेस के साथ जाने से परहेज करने का मन बना लिया है।

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