राजनीति

यूपी में भाजपा धड़ाम, कांग्रेस तमाम: बी. बी. रंजन

उत्तरप्रदेश उपचुनाव में योगी अवैद्यनाथ की सीट पर भाजपा योगी आदित्यनाथ के काल में पराजित हो चुकी है। 2024 के चुनाव में प्रधानमंत्री के दावेदार बनने की संभावना से लबरेज आदित्यनाथ की अपने क्षेत्र में हार हो गयी है। हिन्दू वाहिनी, मठ का आधिपत्य, योगी का चेहरा, अमित शाह का मैनेजमेंट और नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का सपा-बसपा-पीस पार्टी और निषाद पार्टी की गलबहियां ने चित कर दिया है। उत्तरप्रदेश के फूलपुर और गोरखपुर में भाजपा की करारी हार योगी और मौर्य के पूरे दमखम के साथ मैदान में उतरने के बाद हुई। टिकट के बंरवारे में जातीय समीकरण ने उत्तरप्रदेश में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की, लेकिन भाजपा के अंदर योगी की स्वीकार्यता और दमखम पर सवालिया निशान लग गया है। अब तक भाजपा के अंदर बैठे उनके विरोधियों की जुवान खुल सकती है। योगी का शौर्य फीका हो चुका है, स्टार प्रचारक की भूमिका मलिन हो चली है, हिंदुत्व का चेहरा अप्रभावी दिख है और योगी व मौर्य अपने गढ़ में धड़ाम से गिर पड़े हैं। सपा-बसपा की युगलबंदी भाजपा के लिए चुनौती थी, लेकिन गोरखपुर योगी का गढ़ था।

कांग्रेस 2019 के चुनाव में विपक्षी एकता की कवायद कर निर्विवादित नेतृत्व को लालायित है, लेकिन गोरखपुर और फूलपुर में क्रमशः 18 हजार और 19 हजार मतों पर पार्टी सिमट गयी है। कांग्रेस की इस दुर्दशा से सभी विपक्षी दलों की ओर से उसकी स्वीकार्यता पर सवाल खड़ा हो गया है। विपक्षी चेहरा पर कलह की संभावना बढ़ी है और राहुल का मार्ग धुंधला हो गया है।

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