राजनीति

भाजपा दिल्ली हारी तो जदयू के तेवर तल्ख होंगे

भाजपा दिल्ली हारी तो जदयू बिहार में भाजपा की बोलती बन्द कर देगा। प्रशांत के बयान को जदयू का आंतरिक समर्थन है।

महाराष्ट्र और हरियाणा में अमित शाह के बेअसर राष्ट्रवादी और धार्मिक प्रलाप से बिहार जदयू व लोजपा का हौसला अफजाई हुआ। झारखंड में राष्ट्रवाद, धर्म और नागरिक संहिता नकारा हुआ, जबकि भाजपा को कम सीटों पर सिमटाने की लोजपा और जदयू की कोशिश सफल रही। अब दिल्ली में भाजपा की हार उसे बिहार में जदयू नेतृत्व के समक्ष मजबूर कर देगा। दिल्ली चुनाव परिणाम के बाद जदयू सर्वाधिक सीटों पर दावेदारी पेश करेगा, नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ना होगा और सीएम चेहरा भी नीतीश होंगे। लोजपा भी नौ नखरों से बाज नहीं आएगी।

प्रशांत किशोर की 141 सीटों की दावेदारी पर गिरिराज, रामकृपाल एवं नंदकिशोर बिफर चुके हैं। आरसीपी, नीरज और श्याम रजक ने आलाकमान के द्वारा सीटों के फार्मूला के निर्धारण की बात कही है, लेकिन दिल्ली में भाजपा की हार के साथ तमाम नेताओं के तेवर तल्ख होंगे।

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