आपका क्या होगा जनाबे आली……

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अपनी तो जैसे-तैसे, थोड़ी ऐसे या वैसे, कट जायेगी……..


Related image1 मई को विपक्षियों की बैठक में बड़ी बे-आबरू होकर कुचे से निकले थे नीतीश के सहयोगी, लेकिन अब लालू के नहला पर नीतीश के दहला से साष्टांग दंडवत हैं लालू: बी. बी. रंजन


एक ओर 70 सालों से एक आशियाना तलाश रहे गरीब, दूसरी ओर लालू के 22 ठिकानों पर आयकर का छापा


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प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट के तहत बेनामी या अघोषित संपत्ति के मामले में सीबीआई सर्च अभियान चला सकती है और ऐसी संपत्ति का कस्टोडियन सीबीआई होती है. लालू के दामाद शैलेश ने आरोप स्वीकारा, लालू का इंकार.


'My Name Is Lalu Yadav, I Pity Intimidators,' He Tweets On Raids Targeting Him

आपका क्या होगा जनाबे आली……..


बेल पका तो कौए के बाप का क्या: लालू 


कांग्रेस, केजरीवाल, लालू, मायावती, मुलायम और ममता पर भी चलेगी चाबुक. 2019 के ससदीय चुनाव से पहले धराशायी होंगे विपक्षी:. बी. बी. रंजन.

Image result for it raid lalooकल बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सांकेतिक रूप से राजद प्रमुख और उनके परिवार के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने पर केंद्र सरकार को उनके मामले में कानूनी कार्रवाई करने की छूट दे दी थी। आज कथित ‘बेनामी संपत्ति’ के मामले में आयकर विभाग ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और उनके परिवार के 22 ठिकानों पर छापेमारी की।
उधर सुप्रीम कोर्ट ने लालू के खिलाफ चारा घोटाले में एक जैसे सारे मामलों को अलग अलग चलाने की अनुमति दे दी है। अगर सारे मामले इसी तरह आगे बढ़ते हैं तो उन्हें सभी मामलों में सजा हो सकती है। हवाला के कारोबार से जुड़े गिरफ्तार जैन बंधुओं से उनके संबंध खोज निकाले गए हैं, काले धन को सफेद बनाने का सवाल उठा है, बेनामी संपती का मामला है, आय से अधिक संपत्ति का मसला है
बिहार में सबसे बड़े मॉल के निर्माता और दिल्ली के फैंसी फ्रेंड्स कॉलोनी में आलीशान भवन के मालिक लालू प्रसाद एंड फॅमिली के दिल्ली-एनसीआर स्थिति 22 ठिकानों पर आज सीबीआई के 100 ओफिसियल्स और पुलिस की टीम ने छापेमारी की है। दिल्ली, गुडगाँव, रेवाड़ी आदि जगहों  के कुछ बड़े व्यापारियों और रियल एस्टेट के एजेंटों के घरों में भी छापे पड़े हैं।
नीतीश कुमार प्रधानमंत्री पद के दावेदार थे, लेकिन संभावित मोर्चा का कोई भी दल उन्हें बतौर प्रधानमंत्री प्रोजेक्ट करने को तैयार नहीं दिखा। महागठबंधन सरकार के मुखिया नीतीश कुमार के लिए प्रारम्भिक क्षण से ही लालू प्रसाद के दबाव में कार्य करना असहज था,लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्शन के लिए उन्हें लालू की जरूरत थी. एक मई को आहूत विपक्षियों की बैठक में नीतीश कुमार को संयोजक घोषित कराने में जदयू असफल हो गयी। लालू प्रसाद की रुचि बिहार की राजनीति में है। लालू मुख्यमंत्री के पद पर तेजस्वी की ताजपोशी चाहते हैं। संभावित मोर्चा के संयोजक के पद पर नीतीश की जल्दबाजी में ताजपोशी तेजस्वी के भविष्य के लिए खतरनाक था। दोनों नेताओं के बीच अति महत्वाकांक्षा की टकराहट से दबाव की राजनीति खतरनाक दौर में है। दोनों एक दूसरे का उपयोग करना चाहते हैं। अंततः नीतीश कुमार मान चुके हैं कि लालू प्रसाद उन्हें केंद्र की राजनीति में प्रोजेक्ट नहीं करेंगे, लेकिन इस झांसे में भरपूर राजनीतिक लाभ लेते रहेंगे और अंततः तेजस्वी की ताजपोशी का बखेरा आनेवाला है।
बहरहाल नीतीश कुमार दोनों तरफ से सुरक्षित हैं। लालू प्रसाद समर्थन वापस लेने की स्थिति में नहीं है, क्योंकि अभी उन्हें अपनी संतानों को राजनीतिक परिपक्वता और स्थायित्व देना शेष है। अपने बूते महज 22 सीटों तक सिमटने का उनका राजनीतिक वजूद जगजाहिर हो चुका है। इस बार नरेन्द्र मोदी की रणनीति ने तीन तलाक के मसले पर आधे मुस्लिम मतों को तोड़ लिया। हिन्दूत्व की सनक मतदाताओं पर सवार है। नमो की हिंदूवादी चेतना के समक्ष लालू की सामाजिक चेतना की लहत फीकी पड़ गयी है। लालू प्रसाद अब महज एक जाति के नेता के रूप में सिमट गए हैं। इसलिए ‘एकला चलो’ की स्थिति में लालू का जनाधार बिलकुल सिमटनेवाला है। 
मुख्यमंत्री के पद पर नीतीश कुमार कोई रिस्क लेना नहीं चाहते। नीतीश समझ चुके हैं कि हिन्दूत्व और तीन तलाक़ से भाजपा काफी मजबूत हो चली है। सेकुलरिज्म के नारों के दिन लद जाने की उन्हें पूरी समझ है। उनका प्रधानमंत्री का सपना टूट चुका है, मोर्चा के संयोजक की संभावना भी ख़त्म हो गयी है। भ्रष्टाचार के मसले पर लालू का साथ छोड़ने सुअवसर नीतीश के सामने है। इसी बहाने 2020 के चुनाव में लालू के पैंतरेबाजी से भी नीतीश कुमार को निजात मिलनेवाली है और भावी विधानसभा चुनाव में उनकी कुर्सी भी सुरक्षित रहनेवाली है। ‘सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे’ की नीतीए कुमार की पैतरेबाजी से एकबार फिर लालू मिमियाने लगे हैं। 
सुशील कुमार मोदी ने अपने कथन की पुष्टि पर प्रसन्नता जाहिर की है, जदयू के केसी त्यागी ने सीबीआई, इडी और डीआरआइ को भाजपा का नया सहयोगी बताया है। 
लालू प्रसाद का बैकफुट पर आना और कांग्रेस की नीतीश के आगे समर्पण की मुद्रा से नीतीश कुमार आदर्श स्थिति में है। जद यू सूत्रों की मानें तो नीतीश 2019 तक इंतजार करेंगे और संसदीय चुनाव में अपने सांसदों की संख्या में इजाफा के बाद ही सम्मानजनक समझौता करेंगे। भाजपा अभी काफी ताकतवर पार्टी है। उसके समक्ष पुरानी सहयोगी पार्टियों और क्षेतीय दल धराशायी हैं। नीतीश अभी भाजपा के साथ जुड़ कर दोयम दर्जा नहीं पाना चाहेंगे। बहरहाल नीतीश कुमार महागठबंधन से बाहर नहीं निकलेंगे और एनडीए में शामिल होने की भाजपा और लोजपा नेताओं की सलाह नहीं मानेंगे। नीतीश गठबंधन में रहते हुए आगामी संसदीय चुनाव में अपने सांसदों की संख्या में इजाफा करना चाहेंगे लेकिन सत्ता के गलियारे में इसे नीतीश-मोदी की नजदीकी और महागठबंधन के अंत के रूप में देखा जा रहा है। 

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