राजनीति

बिहार में एनडीए हताश क्यों

* बी बी रंजन

बिहार में एनडीए इतनी हताश क्यों है? बिहार और झारखंड के सरकारी अस्पताल सबसे बदहाल हैं, इसलिए मजदूरों और छात्रों को लाने की अनुमति कैसे दे एनडीए सरकार? मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव ने केंद्र से बात कर बिहारी छात्रों का पास रुकवाया। कोरोना का कहर बढ़ेगा तो सरकार बदहाल अस्पतालों को लेकर बबाल नहीं झेल पायेगी और आसन्न चुनाव में नीतीश कुमार की वापसी मुश्किल होगी। ऐसे बता दें कि उद्योग धंधों में चौपट बिहार को अपनी कुल आय का 34 प्रतिशत प्रवासी मजदूरों से आता है।

कलीबुर्गी पुलिस ने सिद्धालिंगेश्वर रथ यात्रा में हजारों लोगों की भीड़ को लेकर ट्वीट किया है, मामला रजिस्टर करने की पुष्टि की है और इंडिया टुडे ने इसकी तस्वीर प्रकाशित की है। येदियुरप्पा मेला लगा रहे हैं, मंत्री जन्मदिन मना रहे हैं और नेताओं की शादी में सैकड़ों लोगों की मेहमान नवाजी हो रही है। लॉक डाउन को धत्ता बतानेवाले सभी सत्ता प्रायोजित कार्यक्रम थे। कहीं चर्चा नहीं है, क्योंकि हिन्दू-मुसलमान के हल्ला का स्कोप नहीं बन रहा।

गृह मंत्री अमित शाह यूपी में फंसे लोगों को सुरक्षित आंध्रप्रदेश पहुंचाने का फर्ज निभा रहे हैं। योगी आदित्यनाथ कोटा से यूपी के छात्रों को घर ला रहे हैं। गुजरात सरकार भी उत्तराखंड से मजदूरों को अपने घर बुला चुकी है। हमारे बिहार के सुशासन बाबू प्रवासी बिहारियों और कोटा में अध्ययनरत बिहारी छात्रों की बिहार वापसी पर आंखे तरेर रहे हैं। मनमोहन सिंह की तरह सुशील मोदी भी मौन हो गए हैं।

कारण साफ है। बिहार में कोरोना का कहर बरपा तो प्रदेश के बदहाल अस्पतालों को लेकर पूरे देश में बबाल मचेगा। इसका सीधे असर आसन्न चुनाव पर होगा और सुशासन बाबू की वापसी पर ग्रहण लगेगा। इसलिए प्रदेश में कोरोना का रैंडम टेस्ट, रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट और प्रवासी बिहारियों एवं छात्रों की प्रदेश वापसी पर ताला लगा है। महामारी के इस दौर में राजनीति गलत है, लेकिन हमारे उपमुख्यमंत्री भी मौन हैं, बिहार भाजपा भी बिल्कुल चुप है और संकेत पूरी तरह राजनीतिक हैं।

बिहार में पन्द्रह वर्षों से एनडीए की सरकार है, लेकिन अस्पताल बदहाल हैं। अस्पतालों में बीपी मापने का यंत्र तक नहीं है, अधिकांश दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं और स्वास्थ्य उपकेंद्रों के ताले नहीं खुलते। अनुमंडलीय एवम जिला अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं नदारद हैं। प्रदेश में महामारी ने अपना विकराल रूप दिखाया तो चुनाव परिणाम पर भारी असर दिखेगा। मौत पर कोरोना की मुहर लगेगी तो हल्ला मचेगा, सत्ता बदलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *