बिहार: फेलियर तंत्र, दावे अनंत

NEWS 0 Comment

बिहार: फेलियर तंत्र, दावे अनंत 

पालीगंज विधानसभा के डॉक्टर्स का हाल
चालीस पदों में सताईस खाली 

MANJUSHA RANJAN

MANJUSHA RANJAN

जयवर्धन के गांव में एक भी चिकित्सक नहीं : मंजूषा  

 पालीगंज विधानसभा का नेतृत्व अभी तक दबंग नेताओं के हाथ में रहा है. लेकिन विगत पैतीस वर्षों से भाजपा ने पालीगंज से बाहरी प्रत्याशियों पर ही भरोसा किया है. स्व. कन्हाई सिंह ने १९७७ में चन्द्रदेव प्रसाद वर्मा को जनता पार्टी से संसदीय चुनाव जीतने में मदद की थी, लेकिन विधानसभा चुनाव में उन्हें जनता पार्टी ने टिकट से वंचित कर दिया था. उन्हें निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ा था और उन्हें जीत मिली थी. कन्हाई सिंह को १९८० में भाजपा ने टिकट दिया था लेकिन रामलखन सिंह यादव ने उन्हें पराजित कर दिया था. स्व. सिंह महज एक बार कांग्रेस पार्टी से टिकट प्राप्त करने में सफल रहे थे. वर्ष १९८० के बाद भाजपा ने पालीगंज से किसी भी स्थानीय  प्रत्याशी को विधानसभा चुनाव में उतारने की नहीं सोची है. फिर बिहटा के चन्द्रदेव प्रसाद वर्मा और बिक्रम के जनार्दन शर्मा का दौर आया. कालांतर में बिक्रम के उषा विद्यार्थी और रामजनम शर्मा को अवसर दिया गया, लेकिन प्रदेश भाजपा ने इन ३५ वर्षों में कभी भी स्थानीय उम्मीदवार को अवसर नहीं दिया.

राजद की सरकार में पालीगंज विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व चन्द्रदेव प्रसाद वर्मा और दीनानाथ यादव ने भी किया है. एनडीए की सरकार में उषा विद्यार्थी भी पालीगंज की सम्मानित विधायक रहीं हैं. बहरहाल स्व. रामलखन सिंह यादव की विरासत संभाल रहे जयवर्धन यादव पालीगंज के विधायक है. इन्हें राजनीति में रामलखन सिंह के पौत्र होने का भरपूर लाभ मिला है. रामलखन सिंह यादव के पुत्र प्रकाशचंद्र को भी एक बार बाढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद बनने का अवसर मिला था और उन्हें धर्मवीर भारती जैसे दमदार नेता को हराने में सफलता मिली थी, लेकिन उन्हें कोलकाता में देह व्यापार में लिप्त पाया गया था और इस मसला को गंभीरता के साथ उठानेवाले एक प्रिंट मीडिया को उन्होंने धमकाया था. यह मामला चला था और प्रकाशचंद्र उर्फ बेबी पर जांच में असहयोग का आरोप भी लगा था, गलतबयानी की बात भी सामने आयी थी. राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की मदद से रामलखन सिंह यादव ने प्रकाशचंद्र को एक बार  फिर विधान पार्षद बनाने में सफलता पा ली थी, लेकिन देश के सजग प्रहरी का ताज धारण करनेवाले रामलखन सिंह यादव के मन्त्रित्वकाल में प्रकाशचंद्र की तानाशाही चलने की खबरें आतीं रहीं और यूरिया घोटाला में उन्हें हवालात की सैर करनी पड़ी. अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा था की प्रकाशचंद्र की मर्जी के बिना उर्वरक विभाग की एक फाइल भी नहीं चलती थी. लेकिन जातीय समीकरण पर होनेवाले लोकतान्त्रिक चुनाव में जयवर्धन यादव को जीत मिली. क्षेत्र की जनता  आज भी उपेक्षित महसूस करती है.

शिक्षा और स्वास्थ्य बुनियादी जरूरतें हैं. पालीगंज के अस्पताल आज भी खास्ताहाल हैं, कल भी खस्ताहाल थे. असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी पटना के अनुसार पालीगंज के विभिन्न अस्पतालों में कुल २७ और दुल्हिनबाजार में १३ चिकित्सकों के पद हैं. सरकार के सुव्यवस्थित चिकित्सा सुविधा के तरह-तरह के दावे हैं, लेकिन वास्तविकता खस्ताहाल है. गरीबों के नाम पर सत्तासीन सरकार चिकित्सा के नाम पर मजाक उड़ाती दिखती है. पालीगंज में २७ में २१ पद रिक्त हैं. दुल्हिनबाजार में १३ में ६ पद रिक्त हैं. पालीगंज में ज्ञानोकोलोजिस्ट एवं एनेस्थेसिया के एक के एक-एक पद और फिजिसियन के दोनों पद खाली हैं. यहाँ ज्ञानोकोलोजिस्ट एवं एनेस्थेसिया के दो पद हैं. जेनेरल सर्जन के भी दोनों पद रिक्त हैं. चर्म रोग के एक, शिशु रोग के दो, कान-नाक-गला के एक, नेत्र रोग के एक, दन्त चिकित्सक के एक, पैथोलॉजी के एक और हड्डी रोग के एक-एक पद हैं, लेकिन सब रिक्त हैं. रेडियोलोजी के दोनों पद खाली हैं. नारी रोग अवं सामान्य चिकित्सक के ५ पद रिक्त हैं. आयूष चिकित्सक के दोनों पद भी रिक्त हैं. पालीगंज के समदा अतिरिक्त स्वास्थ्य उपकेन्द्र में डॉक्टर के दो पद हैं और डॉ. रेखा सिंह नामक एक चिकित्सक पदस्थापित हैं, लेकिन  उपकेन्द्र पर इनका दर्शन नहीं होता. पालीगंज के शेष दो अतिरिक्त स्वास्थ्य उपकेन्द्र कोदहरी और अकबरपुर में स्थित हैं जहाँ कहने को तो चिकित्सकों के दो पद हैं, लेकिन सभी रिक्त हैं.

दुल्हिनबाजार पीएचसी में  डॉक्टर का एक पद रिक्त है. हरेरामपुर, काब और भरतपुरा अतिरिक्त स्वास्थ्य उपकेन्द्र पर एक भी डॉक्टर पदस्थापित नहीं है. कहने को तो इन तीनों केन्द्रों पर डॉक्टर्स के दो-दो पद है. हरेरामपुर राजद के वर्तमान विधायक जयवर्धन यादव का गांव है. अनुबंध पर नियुक्ति के लिए निर्धारित दो पद भी रिक्त हैं. यह तस्वीर एनडीए की सरकार में विधायक रहीं उषा विद्यार्थी के कार्यकाल में भी नहीं बदली, राजद सरकार में मंत्री रहे चन्द्रदेव प्रसाद वर्मा एवं राजद विधायक दीनानाथ यादव के कार्यकाल में भी अपरिवर्तित थी. आज महागठबंधन के विधायक जयवर्धन यादव के काल में भी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं यथावत हैं, बाधित हैं, बदहाल हैं. विधायक का गाँव ही उपेक्षित है तो शेष भाग में बननेवाली संभावना कल्पनीय है.

पालीगंज में पदस्थापित डॉ. शिवलाल चौधरी  खगौल के मौर्य  विहार  में रहते हैं. ऐसे सरकार की घोषित नीति के अनुसार तो डॉक्टर्स को हेडक्वाटर्स के ८ किलोमीटर के दायरे में रहना है. व्यास जी ने  प्रधान सचिव के रूप में कार्य करते हुए एक पत्र जारी किया था. प्रधान सचिव के ज्ञापांक ३२८ (एचएस) दिनांक १८.०७.२०१२ के अनुसार सभी चिकित्सकों एवं अन्य कर्मियों को वेतन निकासी विपत्र के साथ आवासीय पता अंकित करना अनिवार्य है. निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी एवं नियंत्रण पदाधिकारी को इसके लिए जिम्मेदार बनाया गया है. लेकिन पटना आने और जाने का क्रम जारी है. सारे स्वास्थ्य उपकेंद्रों के ताले नहीं खुलते, लेकिन ए एन एम का वेतन भुगतान बेरोकटोक जारी है.

पालीगंज की राजनीति में सक्रिय और नई सुबह नामक एक कल्याणकारी संस्था की सेक्रेटरी मंजूषा कुमारी पालीगंज की उपेक्षा के लिए क्षेत्र के गैर जिम्मेदार प्रतिनिधियों को जिम्मेदार मानतीं है. बकौल मंजूषा पालीगंज के मतदाता भाजपा के बंधुआ मजदूर नहीं हैं. उन्होंने पालीगंज की सक्रिय राजनीति में स्थानीय लेकिन चरित्रवान एवं समर्पित दूरदर्शी व्यक्तित्व को तवज्जो देने का आवाहन किया है. उन्होंने  वंशवादी राजनेताओं को पालीगंज की राजनीति से दरकिनार करने की पुरजोर वकालत की है. उन्होंने क्षेत्र की जनता को लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करनेवाले स्वार्थी राजनीतिज्ञों से सतर्क रहने की सलाह दी है. लोकतंत्र के सट्टेबाजों की राजनीति का हस्र सामने है, राजनीति में वंशवाद का गैर विकासवादी मॉडल सामने है, क्षणिक लाभ, जातिवादी  नारों और लोकलुभावन झूठे वादों का हश्र भी सामने है. अंततः भुक्तभोगी जनता है, ऐसा मंजूषा का मानना है.

पालीगंज के २८ स्वास्थ्य उपकेन्द्रों एक अनुमंडलीय अस्पताल, छह अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और दो प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में से एक की हालत भी ठीक नहीं है. सभी स्वास्थ्य उपकेन्द्रों  की ए एन एम के विषय में  अधिकारियों की घोषणा कमाल है. अधिकारियों के अनुसार सभी ए एन एम अपने उपकेन्द्र के क्षेत्र में निवास करतीं हैं, लेकिन सच तो यही है की सभी ए एन एम पटना या अपने घरों में रहतीं हैं और इनके केन्द्रों पर आने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता. अधिकारी मेहरबान हैं तो वेतन के भुगतान में कोई समस्या नहीं और हमारे सजग और जुझारू प्रतिनिधियों का जुझारूपन आप देखते ही हैं.

Leave a comment

Search

फ्यूरियस इण्डिया

Back to Top