राजनीति

बिहार: नारी-सशक्तिकरण को ललकार रहे गुण्डे

आपकी ढोंगी चौकीदारी, पॉलिटिकल रामभक्ति, जातिवादी सामाजिक न्याय और मौखिक नारी सशक्तिकरण का सच एक लाश बनकर सवाल पूछता है। कायरपन को झकझोरता स्वाभिमान यह पूछता है कि सत्ता अमन यादव और राजा यादव सरीखे आबरू के लुटेरों और हत्यारों का एनकाउंटर कब करेगी। नैतिकता यह पूछती है कि आपके मतों के दावेदार आपकी लुटती आबरू पर कब बोलेंगे? लोकतंत्र जानना चाहता है कि प्रतिनिधि इन गुण्डों के साथ कदमताल मिलाकर कब तक चलेंगे? जमीर पूछता है कि चुनावी काल में अपनेपन के दावों से लबरेज कायर प्रतिनिधि आपकी अस्मत, जान और अधिकार से खिलवाड़ पर चुप क्यों है।

आज जय श्रीराम के उदघोषक कहाँ हैं, नारी सशक्तिकरण का ठेकेदार कहाँ है, सामाजिक न्याय का पुरोधा कहाँ है, कल का मसीहा किधर है? सारे गायब? जबाब दो। …लेकिन जबाब क्या दोगे। तंत्र तो नपुंसक है।

राजनीति तो अब उनकी बपौती है जो ढोंग, कायरता, नालायकीपन और आवारागर्दी की हद तक जाते हैं। आप उनके मुरीद हैं तो हस्र भी सामने है। आज कफ़न में लिपटी उनकी बेटी है, कल आपकी, परसों हमारी ….।

अस्मत के लुटेरों का क्या? उनके पक्ष में तो मसीहा खड़ा है। दरअसल आधुनिक मसीहों के पक्ष में जिन्दाबाद तो वही करता है, राम राज्य की दुहाई भी वही देता है। वही भीड़ का प्रबंधक है, अगुआनी का ठेकेदार है, विकास कार्यों का मुंशी है, नेताजी का सप्लायर है, बेनामी कारोबार का पार्टनर है। सब कुछ वही है जनाब। तब तो कुकर्म के बाद वह नेताओं के सुरक्षित ठिकानों पर चाय पीता है और नेताजी आपके बीच आकर संवेदना बांटते हैं, कड़ी कार्रवाई का संदेश देते हैं और इसकी अपलोडिंग कराई जाती है। …लेकिन कार्रवाई होती कहाँ है। गुंडा तो उनका शागिर्द है।

ओह! आप बखूबी सब जानते हैं, लेकिन हर चुनाव में अनजान बन जाते हैं। कभी खुद, कभी उनका दुर्दांत पुत्र, कभी उनकी बीबी आपकी पसंद है तो खामियाजा कौन भुगतेगा? आप, हम और पूरा समाज। आपकी अदूरदर्शिता आज लाश बनकर आपसे सवाल पूछती है। पूछती है कि समाज के अनगिनत राजा यादव और अमन यादव सरीखे गुण्डों का एनकाउंटर कब होगा? पूछती है कि आप सजग, जिम्मेदार और स्वाभिमानी कब होंगे?

शायद कभी नहीं, क्योंकि इसके लिए आपको जागना होगा, लेकिन आप तो चिर निद्रा में हैं। आपको जगाना मुश्किल है।

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