पेट की भूख, खाली जेब और कर्ज का संकट अर्थात् भारतीय किसान: बी. बी. रंजन

NEWS 0 Comment

देश की ठगीपूर्ण और मूर्खतापूर्ण निति से किसान बेहाल ……

यूपी में माफी तो फिर एनी राज्यों के किसानों के साथ भेदभाव क्यों?

नोटबंदी के कारण नवम्बर में व्यापारियों ने किसानों के धान, सब्जियों, कपास. आलू और सोयाबीन को सही मूल्य देने में असमर्थता जतायी और किसान अपने हाल पर रह गए. गेहूं की फसल अप्रैल में आयी तो सरकार के आरटीजीएस से पेमेंट को जरूरी बताया. दो लाख से अधिक की राशि का नकद लेनदेन आयकर कानून के दायरे में लाया गया तो व्यापारियों ने किसानों से भारी खरीद पर रोक लगा दी. नकद की चाह रखनेवाले किसानों को कम दर पर अपनी ऊपज बेचनी पडी और बदहाल होते गए. नेट बैंकिंग के जरिये आनेवाली उनकी राशी फंसी हुयी हैऔर अब तक किसानों कौउपाज का महज दस-बीस प्रतिशत ही मिला है, लेकिन खरीफ की खेती का सीजन आ गया.

अजीब बिडम्बना है. किसान सबसे बजबूर जीव है. पांच रूपये किलो की दर से मिर्च खरीदनेवाला बाजार में पंद्रह रूपये बेचता और मुनाफा में रहता है. कीमत जब बढ़ती है ति पचाs रूपये किलो की दर से मिर्च खरीदनेवाला व्यापारी उसे एक सौ रूपये किलो बेचता है और लांह में रहता है, लेकिन किसान के लिए जब पचास की दर घटाकर पांच हो जाती है तो इतना नुकसान होता है कि आत्महत्या करनी पड़ती है.

Leave a comment

Search

फ्यूरियस इण्डिया

Back to Top