सामाजिक

नेताजी! अपनी कलाबाजी हमें भी सिखलाइये, लेकिन पहले एक सच बताइए: बी बी रंजन

मॉल आपका, पंप आपका, गैस की एजेंसी आपकी, रियल एस्टेट आपका, फार्म हाउस आपका, कंपनी आपकी, लेकिन जनता का? : बी बी रंजन

आप जनसेवा की दावेदारी के बीच ऐसे अज्ञात कारोबारी है कि आपकी संपत्ति में भारी इजाफा हो जाता है। यह समाजसेवा की कौन-सी विधा है, विकास की कैसी इबादत है? मुझे लगता है कि ठगी आपका धर्म है, लूट आपका मजहब है, छल आपका अघोषित मैनिफेस्टो है, आडम्बर अस्पकी ताकत है, अनैतिकता आपका भगवान है और आप नाजायज संपत्ति के अघोषित, बेशर्म और निकम्मे पुजारी हैं। आप जनता के सेवक नहीं, शोषक हैं।

जनता की आये दिन निकलती ठठरियों के बीच आपकी ठाट बढ़ती गयी, लेकिन आप जनसेवक हैं। चिल्लर पार्टी, चांडाल चौकड़ी और कॉकस लोग आपके आडम्बरपूर्ण राजनीति के प्रचारक हैं, क्योकि आप अपनी लूट का मामूली हिस्सा उन पर खर्च कर देते हैं। उनकी गरीबी, बेकारी अशिक्षा आपकी बकवास और स्वार्थी राजनीति को उर्वर बनाती है, वरना आपको नर्क में भी जगह पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता।

फिर आप अघोषित और घोषित पेट्रोल पम्प के मालिक नही होते, वफादारों के नाम पर मॉल और कमर्शियल काम्प्लेक्स नहीं चलाते, आपकी रीयल एस्टेट में बड़ी अघोषित भागीदारी नही होती, आप समाजसेवी नहीं कहलाते।

जो भी हो, लेकिन मानव के स्वरूप में बैठे राजनीतिक दानवों को समझना जरूरी है।

प्रायोजित उद्घाटन और अध्यक्षीय भाषण का टेंडर लेकर आप कैसी जनसेवा करते हैं?
शादी-जन्मदिन-श्राद्धकर्म में चहरे की झलक से आयोजक की व्यक्तिगत या गांववालों की सार्वजनिक मदद कैसे करते हैं?
मातमपुर्सी और कुशलक्षेम की तस्वीरों की पोस्टिंग कैसी संवेदना है?
बड़े राजनेताओं के बगल में बैठकर तस्वीर लेने और पब्लिसिटी देने की बेचैनी विकास का कौन-सा स्वरूप है?
मानव के शक्ल में बैठे राजनैतिक दानवों को पहचानना जरूरी है। मेहनकश जनता की ठठरी निकल आयी, लेकिन इनके ठाट के क्या कहने?
I am sorry Sir.

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