राजनीति

नीतीश मंत्रिमंडल का आज विस्तार भाजपा पर करारा प्रहार

– ** बी बी रंजन

नीतिश कुमार केंद्र में जदयू की उपेक्षा का आज बिहार में करारा जबाब देंगे। कैबिनेट विस्तार में आज सारे मंत्री जदयू से होंगे, लेकिन रामजतन का क्या होगा? चर्चा में तो नीरज हैं। नीतीश की कार्यशैली बतलाती है कि भूमिहार और दलित मतों को अपने पाले में कर भाजपा का जनाधार तोड़ना चाहते हैं। खुद प्रभावी ओबीसी नेता हैं। जाति के बिना राजनीति की चर्चा कभी पूरी नहीं हो सकती, आदर्शवादी मौखिक व्याख्यायन देते रहें।

नीरज कुमार मूँगेर और जहानाबाद में कड़ी मिहनत का इनाम पायेंगे और ललन सिंह की खानापूर्ति करेंगे तो संसदीय चुनाव से वंचित रामजतन सिन्हा एक सवाल बनकर उभरेंगे। ऐसे कृष्णनंदन वर्मा के जिम्मे दो मंत्रालय है, लेकिन सवाल है कि आज कितने मंत्री बनाये जायेंगे। रामजतन सिन्हा और एक धनबली की पार्टी में एंट्री और लगातार मंत्रालय में भूमिहारों को यथोचित स्थान देकर उन्होंने साबित किया है कि जदयू ने कभी भूमिहारों की उपेक्षा नहीं की।

दलित चेहरा जीतनराम माँझी और उदय नारायण चौधरी की रिक्ति अशोक चौधरी को लाकर पूरी की गई थी, इसलिए लंबी प्रतीक्षा के बाद उन्हें आज मंत्रालय में जगह मिल सकती है। ललन पासवान भी महादलित चेहरा हैं और केंद्र में हालिया उपेक्षा से तिलमिलाये नीतीश कुमार ने साफ शब्दों में कहा था कि मतदान की कतारों को देखें तो आपको दलित और ओबीसी चेहरों की भीड़ दिखेगी, लेकिन बिहार से मंत्रालय में जोर से बोलनेवाले लोगों को लिया गया है। हालाँकि सुरक्षात्मक लहजे में उन्होंने जोड़ा था कि यह भाजपा का मामला है। उन्होंने यह भी कहा था कि दलितों और पिछड़ों को सम्मानित करने की उनकी प्रतिबद्धता है। इसलिए दलितों के सम्मान के तहत ललन पासवान को भी मंत्री बनाये जाने की संभावना चल रही है। अशोक चौधरी तो बहुचर्चित हैं। चौथा, लेकिन संदिग्ध नाम रंजू गीता का है। संजय झा की भी मजबूत संभावना है। लालू की सलाह पर मंत्रालय से दरकिनार हुए श्याम रजक का नाम भी चल रहा है।

अपने नए मंत्रालय विस्तार से नीतीश कुमार भूमिहारों, दलितों और पिछड़ों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश करेंगे। इन वर्गों और जातियों के बीच अपना जनाधार बढ़ाना चाहेंगे और भाजपा को कमजोर करने के लिए भूमिहार एवं दलित मतों में बिखराव उनकी पहली प्राथमिकता है। नीतीश कुमार खुद एक मजबूत ओबीसी चेहरा हैं।

रामजतन सिन्हा का मामला फंस सकता है। राहुल शर्मा को भी पक्ष में लाया गया है और उन्होंने चन्द्रवंशी के लिए पूरी ताकत भी झोंकी थी। इसलिए जहानाबाद विधानसभा से टिकट का मामला भी फँसता है। कृष्णनंदन वर्मा घोसी से विधायक हैं। कुर्था से सहदेव हैं। मखदुमपुर सुरक्षित है। अरवल बहरहाल भाजपा के कोटे में है, लेकिन रामजतन सिन्हा या राहुल को सूट नहीं करता है। यदि पसंद की बात होती तो नीतीश कुमार ने 2005 में ही अरवल रामजतन सिन्हा के लिए छोड़ दिया था। उनकी लगातार अनिच्छा के बाद अंततः कृष्णनंदन सरदार के पुत्र को उतारा गया था।

विधानसभा के लिए एक मात्र जहानाबाद सीट रामजतन सिन्हा के पसंद की है, लेकिन राहुल कहाँ जायेंगे। कुर्था खाली नहीं है। कृष्णनंदन वर्मा का घोसी में काफी विरोध है, लेकिन सीटिंग विधायक हैं। उपेन्द्र कुशवाहा की सेहत बिल्कुल बिगड़ गई है, लेकिन वर्मा कोईरी चेहरा हैं। सहदेव भी कोईरी चेहरा हैं। सिन्हा लंबी उपेक्षा औऱ प्रतीक्षा वाले व्यक्ति नहीं है। उनके उबाल को रोकना मुश्किल है। संसदीय चुनाव में चन्द्रवंशी के पक्ष में उनकी शिथिलता घोषित थी।

पालीगंज के एक धनबली का जदयू में चर्चित प्रवेश भी अधमरा हो चुका है।

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