सामाजिक

नारी सशक्तिकरण या बलात्कार का दौड़: बी बी रंजन

न्यूयॉर्क और लन्दन के समाचारपत्रों के संपादकीय कॉलम में भारत की निंदा हुई है। इंटरनेशनल मॉनिटर फंड के अध्यक्ष ने भारत में महिलाओं की असुरक्षित स्थिति की निंदा की है। सुश्री स्वाति मानीवाल बलात्कारियों को कठोरतम दण्ड देने की मांग को लेकर अनशन पर हैं। उनकी मांग है कि बलात्कार के मामलों को छह माह में निपटा लिए जाएँ और पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ा दी जाये।
देश की बेटियों के साथ वलात्कार और फिर हत्या का सवाल है।आज उनकी बेटी है, कल हमारी, परसों आपकी। सुश्री मानीवाल बलात्कारियों के खिलाफ कठोर कानून की मांग को लेकर उपवास पर हैं।
हमारा समाज भी सडको पर अश्लीलता पड़ोसने लगा है। प्यार पर पहरा नहीं का स्लोगन राजनेताओं ने दिया तो कई प्रेमी युगल पार्क और चलती सडकों पर प्यार की भौंडी शक्ल परोसने लगे और सडकों या सार्वजनिक जगहों पर बाप-बेटी या भाई-बहन का चलना मुश्किल हो गया। फ़िल्मी सितारे विकसित, प्रतिष्ठित और सफल व्यक्तित्व बनकर सार्वजनिक स्थलों पर मीडिया में डिंग मारते रहे, लेकिन अश्लीलता, बलात्कार, अपराध जैसे घिनौने कुकृत्य का परिवेश उनलोगों ने ही तैयार किया है। पिछले कई वर्षों से उनकी अश्लीलता अपनी फिल्मों को हिट कराने की भावना से प्रेरित रही है। इसमें समाज-सुधार या सकारात्मक संदेश जैसा कोई उद्देश्य नहीं रहा है। लड़कियों को आजादी की जरुरत है, लेकिन सार्वजनिक जगहों पर अश्लीलता, सडकों पर प्यार का प्रदर्शन और सोच में बदलाव का तर्क भी बेतुका है। नारी सशक्तिकरण नारी को सबल बनाने की भावना से ओतप्रोत है। सडकों पर अश्लील कपड़ों का शौक, अर्धनग्न चलने का लज्जाजनक फैशन और सोच में बदलाव के अनावश्यक तर्क के आधार पर भारतीय संस्कृति को तिलांजलि देने का कोई आधार नहीं बनता। नारियों को सम्मान के साथ सफल और शिक्षित बनायें, उनकी भागीदारी सुनिश्चित करें, लेकिन अश्लीलता भारत की संस्कृति नहीं। महिलाओं की रक्षा के लिए कानून बनायीं जाये, उनका समय से और कड़ाई से पालन हो, लेकिन कानून का बेजा लाभ उठाने के कई उदहारण अस रहे हैं। महिलाएं कानून को अपनी ताकत समझें, उसे किसी को मजबूर करने का हथियार न बना लें।
पुरुष समाज शोषक की भूमिका चाहता है। सडकों पर चलती महिलाओं पर सामान्यतः पुरुषों की अच्छी निगाह नहीं पड़ती। बलात्कार के विरोध में झंडा धोने और प्रवचन करनेवालों का चरित्र भी दागदार देखा गया है। इलियासी किसी हैं।
प्रधानमंत्री बाहर हैं। कल 21 अप्रैल को सबल भारत मानीवाल का उपवास तोड़वाने की कोशिश करेगा। भारत सरकार का कोई व्यक्ति मानीवाल से मिलने अब तक तो नहीं गया है।
कहने को तो पूरे देश में सिद्धान्ततः नारी नसशक्तिकरण का दौड़ है, लेकिन बलात्कार का दौड़ भारी पड़ गया है।

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