Investigations

देश के अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव

एक पूर्णतः स्वदेशी रेलवेकर्मी की मौत के साथ कोरोना स्टेज थ्री की संभावित दस्तक, लेकिन सरकार की कुंभकर्णी निद्रा आधी टूटी है। लाश बनने के बाद टेस्ट रिपोर्ट आ रही है, मौत के बाद अंत्येष्ठि स्थल से जांच सैंपल लिए जा रहे हैं। देश में स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है और कोरोना को लेकर पिछले दो महीनों के इंतजामात में बड़ी कोताही की खबरें आईं हैं: बी बी रंजन

देश में महज 90 लोगों की रोजाना जांच हुई है। भारत ने कल निजी कंपनियों को कीट बनाने का आदेश दिया है। देश में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अस्पतालों में चिकित्सक, नर्स, कंपाउंडर, फार्मासिस्ट, बेड, वेंटिलेटर, दवाइयों, जांच सुविधाओं, जांच केंद्र और पीपी मैटेरियल की भारी कमी है। दो माह बीत गए, स्टेज थ्री प्रायः दस्तक दे चुका है, लेकिन सरकार अब कीट बनाने की अनुमति दे रही है। अभी तक ग्रामीण क्षेत्रों से जिला स्तर तक के अस्पतालों में कोई बुनियादी प्रबन्ध नहीं किए गए हैं। डब्लयू एच ओ बार बाए सिर्फ टेस्ट, टेस्ट और टेस्ट की बात कह रहा है।

अभी तक जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर तक कोरोना के इलाज के कोई इंतजामात नहीं हैं। बड़े शहरों में भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। उन क्षेत्रों में कोई बुनियादी व्यवस्था, आइसोलेशन वार्ड वगैरह नहीं बनाए गए हैं। कर्मियों को कोई सुरक्षा नहीं दी गई है। इक्विपमेंट नहीं हैं, अधिकांश मशीनें खराब हैं, मशीनरी की भारी कमी है। अभी तक तमाम निजी अस्पतालों, बड़े भवनों, स्कूलों, कॉलेजों, होटलों को आइसोलेशन वार्ड में बदलने के कोई प्रयास नहीं हुए हैं।

अब मामूली संख्या में निजी अस्पतालों को चयनित किया जा रहा है, 12 नए निजी जांच केंद्रों को अब अधिकृत किया गया है। पन्द्रह हजार सैंपल कलेक्शन सेंटर हैं, लेकिन जरूरत बड़ी है। जांच-केंद्रों की अभी भी भारी कमी है। भारत में स्वास्थ्य से जुड़ी आधी सामग्रियां निजी सेक्टर से आतीं हैं और 70 प्रतिशत नर्सिंग क्षेत्रों पर निजी संचालकों का कब्जा है। उन्हें अधिकृत किया जाना चाहिए था। भारत के पास तैयारी के पर्याप्त समय थे।

भारत दुनियां की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है और स्टेज थ्री पूरी तरह आउट ब्रेक हुआ तो मरीजों की चिकित्सा भारी पड़ेगी। तब लोगों का उपचार होगा या उपचार के प्रबंध होंगे, कहना मुश्किल होगा।

लॉक डाउन का गंभीरता से पालन करें। सुरक्षा ही बचाव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *