राजनीति

तीसरा चरण एनडीए का हो सकता है

बिहार से बाहर दूसरा चरण भाजपा के लिए ठीक-ठाक था। अब केरल-असम-बिहार-यूपी में मशगूल राहुल-प्रियंका की गुजरात-राजस्थान-छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश की अनदेखी से काँग्रेस 44 से ऊपर, लेकिन 100 के भीतर निपटती मिलेगी और  हरियाणा के गुरूग्राम, रिवाड़ी से राजस्थान भाया अलवर, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर महाऱाष्ट्र, मुंबई, कोंकण, 19 सीटों वाली तटीय कनार्टक के इलाके में भाजपा सर्वाधिक सीटें जीत लेगी।  इन राज्यों में भाजपा की सीटें घटेंगीं, लेकिन बराबरी दिख रहे राज्यों में अब काँग्रेस मध्य प्रदेश में 10, राजस्थान और गुजरात में 4-5 सीटों पर रुकती दिख रही है। इस पट्टी का कमजोर चुनाव नतीजे परिणाम उसे क्षत्रपों के आगे लाचार करेगा। मैंने चार माह पूर्व लिखा था कि बिहार-यूपी में राजद-सपा-बसपा को अपनी ताकत दिखाने के मुगालते में राहुल-प्रियंका मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़ में पिछड़ेंगे।

राहुल-प्रियंका बिहार-यूपी-केरल-असम आराम से घूमते रहे तो मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात में बराबरी पर आ चुकी काँग्रेस देश में 100 के भीतर होगी और तीसरा चरण भी भाजपा का होगा। राहुल-प्रियंका की रोड शो और सभाओं में कोताही, प्रत्याशी चयन में गड़बड़ी और काँग्रेस की प्रादेशिक टीम की पूरी शिथिलता से सिर्फ दमदार प्रत्याशियों की चर्चा है। मध्यप्रदेश में काँग्रेस की गिनती 10 से ऊपर नहीं जा रही, गुजरात 5-6 पर सिमटती जा रही है और राजस्थान में तो कुछ दिख ही नहीं रहा। विधानसभा परिणाम के मुगालते हवा में तैर रही काँग्रेस राजद-सपा-बसपा को औकात बताती रही और नरेंद्र मोदी की एकतरफा चर्चा उन राज्यों में हावी हो गई है। भाजपा की प्रादेशिक टीम भी निष्क्रिय है, लेकिन दमदार प्रत्याशी की उपस्थिति और नमो-शाह की धुआँधार मिहनत से नमो का नाम इन राज्यों में लौट आया है। काँग्रेस की चूक से इन राज्यों में बराबरी की प्रतिद्वंद्विता से लगातार खत्म हो रही है।

7 दिनों बाद मध्यप्रदेश में और 12 दिनों बाद राजस्थान में चुनाव है, लेकिन राहुल-प्रियंका की न सभायें हैं, न रोड शो।

राजस्थान की 25 सीटों में पांच सीटें भी कांग्रेस की समझ नहीं आ रही हैं तो मध्य प्रदेश की 29 सीटों में दस पर गिनती ठहर जा रही है। अमरेली, जूनागढ़, आनंद, पाटन, सुरेंद्र नगर. मेहसाना, दाहोद, बनासकांठा, छोटा उदयपुर, वलसाड़ सहित 12-15 आदिवासी और ग्रामीण आबादी बहुल सीटों पर कांग्रेस भाजपा के लिए चुनौती बन सकती थी, लेकिन राहुल-प्रियंका की सक्रियता के बिना काँग्रेस का हल्ला नहीं है। सात दिन बाद होनेवाले मतदान में दोनों सीन से गायब हैं।

राजस्थान में 11 दिन बाद 12 सीटों पर चुनाव है। अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत जोधपुर से चुनाव में हैं। तमाम सीटों पर काँग्रेस का प्रचार नहीं है। जोधपुर, टोंक-सवाई माधोपुर और बाडमेर में जातीय समीकरण के अनुसार कांटे की लड़ाई हो सकती है, लेकिन अजमेर, पाली, जालौर, उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, कोटा, झालावाड़ में काँग्रेस की खटिया खड़ी है।

विधानसभा चुनाव के बाद राजस्थान में काँग्रेस और भाजपा के बीच बराबरी का मुकाबला संभावित था, अब काँग्रेस की तबियत बिगड़ गई है। मध्य प्रदेश अब कांग्रेस की सात-आठ सीटों पर बेहतर स्थिति है  और मुकाबला सिर्फ 12-15 सीटों पर दिखता है।

दिल्ली में भी आप और काँग्रेस का एलायंस नहीं हुआ तो भाजपा को सर्वाधिक सीटें मिलेंगी। भाजपा बनाम कांग्रेस की सीधी लड़ाई वाली सीटें नरेंद्र मोदी के लिए अवसर हैं।

तभी कांग्रेस, राहुल-प्रियंका के लिए जागने का वक्त है। राजस्थान से तटीय कर्नाटक में जहां-जहां भी मुकाबले की दशा है वहां पूरी ताकत झोंकने का वक्त है, लेकिन राहुल-प्रियंका इन राज्यों में बड़ी सीटें गँवाकर बिहार-यूपी की 10 सीटों को जीतने में मशगूल हैं।

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