अपराध

जिंदगी की जंग हार गई वीरांगना

मुजफ्फरपुर। दुराचारी की कोशिश को विफल करने के दौरान 85 प्रतिशत जली वीरांगना ने अंततः दम तोड़ दिया। हम इतने नकारा हो गए कि समाज कि एक बेटी की अस्मत विगत तीन वर्षों में नहीं बचा पाए। हम इतने काहिल हो गए कि अंततः एक अदद गुंडा हवस में विफल होने पर उसका खून कर गया। हम इतने कायर हो गए कि सरकार गूंगी, बहरी, लँगड़ी बनकर वर्षों से दुष्कर्म व गैंग रेप की एक के बाद दूसरी घटना पर कड़ी कार्रवाई का फर्जीवाड़ा चलाती रही और बेखौफ गुंडे सरेआम अस्मत लूटते रहे। गुण्डों पर इतनी सनक सवार है कि उन्हें आपका और हमारा दरवाजा भी पता है। यह देश और प्रदेश के लिए काला दिवस है, इसलिए विरोध लाजिमी है परिणाम के हद तक।

हम फर्जी चौकीदार, गैर जिम्मेदार मतदाता, बकबास कार्यकर्ता, नकारा प्रशासन और बेशर्म राजनेता के रूप में जीवित हैं। एनडीए की फर्जी नारी सशक्तिकरण की जुमलेबाजी करती सरकार मौन रह गई, विपक्ष गुंडे की जाति का जनाधार जानकर चुप हो गया, हालिया बहरूपिया मसीहा जातिवादी सोच के कारण दरिंदा के पक्ष में खड़ा है।

आश्चर्य है कि तीन वर्षों से प्रताड़ना झेल रही लड़की को बचाने में समाज, प्रशासन और कानून विफल रहा। हमारी सरकार विफल रही। अंततः दो दरिंदों ने घर में प्रवेश कर लड़की को हवस का शिकार बनाने की कोशिश की, विफल होने पर उसे जिंदा जला दिया। इतनी वीभत्स घटना पर हमारे कानों में जूं तक नहीं रेंगे। बस यह सोच कर कि वह किसी की बेटी या बहन रही होगी। अपना क्या लेना?

हम इतने पतित, कायर, निष्ठुर, स्वार्थी, काहिल और निर्लज्ज हो गए। फिर इन सरकारों को काबिज करनेवाले मतदाताओं को भी धिक्कार मिलेगी, समय उनका भी इतिहास लिखेगा, उनकी तटस्थता भारी पड़ेगी।

गुण्डों पर इतनी सनक सवार है कि उन्हें आपका और हमारा दरवाजा भी पता है। विरोध लाजिमी है परिणाम के हद तक।

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