जनसमस्याओं को मात दे गया चुनावी जीत का हल्ला बोल: बी. बी. रंजन.

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी


जनता की सोच को सठिया गए राजनेता 


pm narendra modi predicted by nostradamusआज सियासी दलों ने देश को इस कदर राजनीतिक रंग में रंग दिया है कि जनता महज चुनावी जीत को सारे आरोपों का खात्मा समझ लेती है। आज राजनैतिक दलों की हल्ला बोल नीति के दायरे में जनता इस कदर सिमट गयी है कि बिजली, पानी, सड़क, कानून, शान्ति, नारी-सम्मान, अस्मिता, सभ्यता, संस्कृति, सुरक्षा, शिक्षा स्वास्थ्य, पारदर्शिता, ईमानदारी, साख, राजकता, बेकारी, जैसे तमाम मुद्दे गौण हो गए हैं और किसी भी तरह चुनाव जीत को सम्मानित किया जाने लगा है। आजादी के सत्तर सालों के बाद भी जनता बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी सुविधाओं से वंचित है, लेकिन अपने चहेते सियासी दलों को चुनावी जीत दिलाने का जूनून सर चदकर बोल रहा है। समर्थन के कारणों पर सवाल करे तो न तो मरादाताओं को पता है और न ही मतदाता इसके उलझन में पड़ना चाहते हैं। सियासी दलों के भावनात्मक मुद्दों ने इन्हें इस कदर जकड रखा है कि मतदाताओं ने भी किसी तरह अपनी पसंद की पार्टी को विजयी बनाना चाहते हैं। कल क्या होगा, बहरहाल इससे उनका कोई लेना-देना क्योनी उन्हें तो अपने दलों की जीत की पडी है।
Image result for लालू प्रसाद यादवसालों की सियासी चाल का रंग इतना गहरा है कि लालू प्रसाद और चिदंबरम के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों में पड़ें छापे की गंभीरता को भी चुनावी जीत-हार और नीतीश-भाजपा  की सियासी चाल से जोड़ कर देखा जा रहा है। भ्रष्टाचारियों के कारनामों को चुनावी जीत के रंग में रंग कर आर्थिक अपराधियों के गुनाहों को शहादत का स्वरूप देने का फैशन चल पड़ा है. दोनों के समर्थक अपने नेताओं के साथ चिपके हुए हैं और देश की, जनता की लुटती अकूत दौलत का दंश जनता को प्रभावित नहीं करती. उन्हें लालू और चिदंबरम की सुरक्षा की पडी है. बहरहाल जनता को अपने आकाओं का भ्रष्टाचार भी प्रभावित नहीं करती, बल्कि किसी भी कीमत पर उनका बचाव Related imageउनके लिए भी अहम् है, जिसे ये राजनेता वर्षों से लुटते रहे हैं। आजाद भारत के सपनों को तिलांजली देकर जाति और संप्रदाय के दायरे में हम सिमटते गए और हमारा हर रूप में दोहन होता चला गया। शोषण का ग्राफ बढ़ता गया और हम मस्त होते चले गए।
लालू-चिदंबरम-ममता-माया-मुलायम-अरविन्द के खिलाफ जारी या संभावित छापों और कार्रवाइयों का राजनीतिक मिशन चाहे जो हो, लेकिन ठठरी हो चुकी जनता के जनसेवकों की ज्यामितीय आकार से बढ़ती संपत्ति लोकतंत्र के लिए खतरा है, जनता की बर्बादी का कारण है और उनके प्रति हमारी अंधभक्ति देश के विनाश की गारंटी है, गुलामी की नई इबादत की पृष्ठभूमि है।

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