गुजरात में कांग्रेस टूटनेवाली है, माया को लालू राज्यसभा भेज सकते हैं बी. बी. रंजन.

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Image result for shankar singh vaghelaपैतीस विधायकों के द्वारा समर्थित शंकर सिंह वाघेला को कांग्रेसी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं किया गया है। नाराज वाघेला कांग्रेस का परित्याग कर भाजपा की ओर मुखातिब हो सकते हैं। कांग्रेस हार्दिक पटेल का समर्थन पाकर शायद कांग्रेस विधायकों की भागदड़ रोक लें, अन्यथा भाजपा राज्यसभा की एक सीट को लेकर कांग्रेस को तोड़ सकती है। गुजरात में राज्यसभा की तीन सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से दो सीटें भाजपा की स्मृति ईरानी और दिलीप भाई पंड्या की है। कांग्रेस की एक सीट कद्दावर कांग्रेसी अहमद पटेल की है। स्मृति ईरानी की वापसी तय है।
एक सीट जीतने के लिए 46 वोट की जरूरत होगी। गुजरात विधानसभा में कांग्रेस के 57 विधायक हैं। आठ जून को होनेवाले राज्यसभा चुनाव में शंकर सिंह वाघेला पर अपने विधायक बेटे सहित 20 समर्थक विधायकों को अलग करने की जिम्मेदारी है ताकि तीनों सीटें भाजपा को मिल जाएं और अहमद पटेल जैसे कद्दावर नेता को राज्यसभा से बाहर रखकर एज तगड़ा मैसेज दिया जाए। बहरहाल घबराहट में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने वाघेला से मुलाकात की है और टूट की संभावना को नकार रहे हैं। वाघेला ने चुनाव प्रचार की कमान थामने से भी मना कर दिया है। 
चर्चा है कि वाघेला समर्थक कांग्रेस विधायक राघवजी पटेल, महेंद्र सिंह वाघेला, मानसिंह चौहाण, राजेंद्र सिंह परमार, सी के राउल, धर्मेंद्र जाडेजा सहित करीब एक दर्जन विधायक पाला बदलने की तैयारी कर रहे हैं। भाजपा की ओर से उनकी पार्टी में आनेवाले कांग्रेसी विधायकों का सम्मान है। बीस साल पहले वाघेला ने मोदी की नीतियों और कार्यशैली के चलते ही बीजेपी छोड़ी थी।
पश्चिम बंगाल की छह राज्यसभा सीटों में चार तृणमूल कांग्रेस की और एक सीपीएम और एक कांग्रेस की सीट है। पांच सीटें तृणमूल कांग्रेस के खाते में जा सकती है। एक सीट जीतने के लिए 43 वोट की जरूरत है।तृणमूल को 215 वोट की जरूरत है और सदन में उसके 211 सदस्य हैं। 45 विधायकों वाली कांग्रेस एक सीट जीत सकती है। सीपीएम की नियमावली केअनुसार कोई भी व्यक्ति तीसरी बार राज्यसभा नहीं जा सकता और सीताराम येचुती इस आधार पर राज्यसभा जाने से इंकार कर चुके हैं।
वर्त्तमान कांग्रेसी सांसद प्रदीप भट्टाचार्य को दरकिनार कर ममता बनर्जी और प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी की विरोधी, लेकिन सोनिया गांधी परिवार की काफी करीबी दीपा दासमुंशी को भी राज्यसभा भेजा जा सकता है। उनके पति प्रियरंजन दासमुंशी पिछले करीब दस साल से कोमा में हैं। लेकिन मुश्किल यह है कि दीपा दासमुंशी की  साथ उनके संबंध अच्छे नहीं हैं। 
पहले कहा जा रहा था कि सपा, बसपा और कांग्रेस मिल जाएंगे तो दो सीटें जीत सकते हैं। इनमें से एक सीट पर अखिलेश यादव राज्यसभा में जाएंगे और दूसरी पर मायावती। सपा अपने बचे हुए वोटों से उनकी मदद कर देगी। गौरतलब है कि उत्तरप्रदेश में राज्यसभा की दस सीटें खाली होनेवाली हैं।  एक सीट के लिए 37 मतों की जरूरत है। मायावती अपने बूते राज्यसभा में जाने से वंचित हैं। सपा-बसपा-कांग्रेस गठजोड़ से माया राज्यसभा पहुँच सकतीं हैं। अखिलेश यादव भी राज्यसभा जानेवाले हैं। 
लालू प्रसाद की मदद से मायावती को बिहार से राज्यसभा में भ्हेजाकर रामविलास पासवान के उदहारण को दुहराया जा सकता है। अगले साल बिहार में छह सीटें खाली हो रही हैं। इनमें से दो सीटें राजद, दो सीटें जदयू,  एक सीट कांग्रेस और एक सीट भाजपा को मिलेगी। पटना के गांधी मैदान में 27 अगस्त को होने वाली लालू प्रसाद की रैली के बाद तस्वीर साफ होगी। 

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