राजनीति

खराब आर्थिक जनाना निकालेंगी

जीएसटी और नोटबन्दी जैसे गलत निर्णयों से चरमराती आर्थिकी से देश की रीढ़ टूट गई है। इसलिए विमानन, रेलवे और संचार सेक्टर से बाहर होने के बाद केंद्र सरकार भारी मुनाफे में चल रही पांच सार्वजनिक उपक्रमों को भी बेचने की चूक करेगी। सरकार ने देश की निजी कंपनियों को करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए की राहत दी है, इसलिए पाँच सरकारी कंपनियों को बेचकर एक लाख पांच हजार करोड़ रुपये अर्जित करेगी। जीएसटी के बाद सरकारी राजस्व घटा है। उसकी भरपाई के लिए सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने की बेबसी आ गई। सरकार जनता के ऊपर इन फैसलों से पड़नेवाले प्रभावों का आकलन पहले नहीं, बल्कि बाद में करेगी। जीएसटी में सैकड़ों संशोधनों के बाद भी वित्त मंत्री ने अभी कई त्रुटियों को स्वीकार किया है। खास्ताहाल सरकार को रिजर्व बैंक के आरक्षित कोष से एक लाख 76 हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेना पड़ा। इसलिए जर्जर हालात में राष्ट्रभक्ति और मजबूती के खोखलेपन को पाक और हिन्दूत्व से बाहर निकलकर देखना होगा।

केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में चार मंत्रियों का एक समूह करीब 75 हजार करोड़ रुपए के कर्ज में चल रही एयर इंडिया को बेचकर सरकार विमानन के कारोबार से बाहर हो जाएगी। कर्ज इतना ज्यादा है कि बिक्री से उसे कमाई नहीं होगी। सरकार हवाई अड्डों को भी बेच रही है।

रेलवे के निजीकरण की शुरुआत हो गई है, पहले चरण में डेढ़ सौ ट्रेनों और 50 स्टेशनों को निजी हाथों में देने जा रही है। यह सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र से सरकार को पूरी तरह बाहर निकलने की पृष्ठभूमि है।

बीएसएनएल और एमटीएनएल को बंद कर संचार को पूर्णतः तीन निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। जिओ का बढ़ता कालिंग रेट को सबों ने महसूस किया है।
इसके अतिरिक्त लाभ अर्जित करनेवाली पाँच अन्य कम्पनियाँ बिकनेवाली हैं।

भारत पेट्रोलियम और बीपीसीएल को वित्तीय वर्ष 2018-19 में सात हजार करोड़ का मुनाफा हुआ, लेकिन अब सरकार 53 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी बेचेगी। इससे सरकार को 54 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम मिलेगी। इन कंपनियों की बाजार पूंजी एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हैं। इन कंपनियों में 4 हजार लोग कार्यरत हैं।

35 हजार करोड़ रुपये की मार्केट पूँजी वाली कंटेनर कारपोरेशन, कॉनकोर ने पिछले वर्ष 12 सौ करोड़ रुपये का मुनाफा अर्जित की है, लेकिन सरकार इसकी 30 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने जा रही है।

सरकार भारी मुनाफे वाली शिपिंग कारपोरेशन ऑफ इंडिया, नार्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन लिमिटेड और टीएचडीसी को भी बेचनेवाली है। पिछले वित्त वर्ष के आंकड़ों के मुताबिक नौ हजार करोड रुपए से कुछ ज्यादा की बाजार पूँजी वाली टीएचडीसी ने 12 सौ करोड़ रुपए से अधिक का मुनाफा कमाया। वित्तीय वर्ष 2017-18 में शिपिंग कारपोरेशन का मुनाफा ढाई सौ करोड़ रुपए से ज्यादा रहा और नार्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन को लगभग 270 करोड़ रुपए का लाभ हुआ।

घाटे में चल रही कंपनियों को बेचकर उन्हें सुधारना एक पहल मानी जाती, लेकिन लाभ अर्जित करनेवालीं कंपनियों को बेचकर सरकार चलाने के लिए पैसा अर्जित करने की मजबूरी भावी त्रासदी में कई अध्याय जोड़ेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *