राजनीति

कौन-कौन झूठ बोल रहा है?

बी बी रंजन

प्रधानमंत्री ने रविवार को रामलीला मैदान में एनआरसी और असम में डिटेंशन सेंटर की बात को शहरी नक्सलियों और कांग्रेस के द्वारा प्रचारित झूठ करार दिया। उन्होंने इस बयान से खुद, गृहमंत्री अमित शाह व नित्यानंद राय, राष्ट्रपति, तमाम हकीकतों और न्यायालय में दायर हलफनामों को संदिग्ध बना दिया। इस बयान के ठीक 48 घंटे बाद ही केबिनेट की बैठक में एनपीआर पर ठप्पा लगाने की इतनी जलदीबाजी क्यों हुई।

एनआरसी और घुसपैठियों को निकालने की मोदी सरकार की प्राथमिकता पर पीएम का साक्षात्कार, इस पर गंभीरता से काम करने के गृह मंत्री के दावे, राष्ट्रपति के सदन में बयान, टेलिग्राफ की खबर, कर्नाटक के न्यायालय में केंद्र और राज्य का हलफनामा। सब झूठ?

प्रधानमंत्री के इंटरव्यू का एक अंश है: “असम में एनआरसी के अनुभव से जो तस्वीर बनी है वह बहुत चिंताजनक है और यदि चिंताजनक है तो देश में उस पर बहस होनी चाहिए। दुनिया में कोई देश कैसे धर्मशाला बना रह सकता है? कौन-सा देश है जिसने नागरिकता रजिस्टर नहीं बना रखा है? सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए जिन्होने 70 सालो में नागरिकता रजिस्टर नहीं बनवाया, नागरिकों का रजिस्टर नहीं बनाया।” इस बयान को प्रधानमंत्री की ओर से रविवार को जारी हालिया बयान खारिज करता है। सदन में आनन फानन में पारित एनपीआर प्रधानमंत्री की ओर से रविवार को जारी बयान को खारिज करता है। तो सच क्या है? लोग भरोसा किस पर करें?

भाजपा, मोदी सरकार, राष्ट्रपति, गृह मंत्री ने दूसरी शपथग्रहण के बाद ही एनआरसी को सुनिश्चित बताया था। 9 दिसम्बर को लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह और नई सरकार के पहले संसद सत्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के बयान आये थे। सब झूठ?

असम में एनआरसी रजिस्टर और प्रोसेस हो चुका था, लेकिन प्रधानमंत्री ने इसे नकार दिया। उन्होंने असम में डिटेंशन कैंप को और इसमें घुसपैठियों को रखने की बातों को भी हवाबाजी बतलाया। टेलिग्राफ अखबार में असम के गोलपारा जिले के कदमटोला, गोपालपुर में लगभग 47 करोड़ रूपए की लागत से तीन हजार घुसपैठियों को रखने की क्षमता वाले निर्माणाधीन डिटेंशन सेंटर की तस्वीर छपी है। असम में जेलों के कम से कम छह डिटेंशन सेंटर की मौजूदगी बतलाई गई है। असम में गोलपारा, कोकरझार, सिल्चर, डिब्रूगढ़, जोरहाट, तेजपुर में छह डिटेंशन सेंटर है। असम सरकार के इन डिटेंशन सेंटरों की केंद्र के गृह मंत्रालय से मंजूरी है। दस और सेंटरों की अनुमति केंद्रीय गृह मंत्रालय से मांगी गई है। तो क्या टेलिग्राफ की यह खबर भी झूठ है?

गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने संसद को बताया था कि असम के छह सेंटरों में 1, 043 विदेशी रखे गए हैं, जिसमें 1025 बांग्लादेशी और 18 म्यंमारी हैं। संसद में यह भी जवाब है कि असम के डिटेंशन केंद्रों में 28 अवैध घुसपैठियों की मौत हुई है। क्या गृह मंत्री सदन में झूठा बयान देकर सदन और देश को गुमराह करते हैं?

महाराष्ट्र में फड़नवीस सरकार ने केंद्र सरकार के निर्देश पर गैर-कानूनी घुसपैठियों को रखने के लिए जगह चिंहित की है। क्या यह भी झूठ है? कर्नाटक हाईकोर्ट में विदेशी गैर-कानूनी लोगों, घुसपैठियों एवम डिटेंशन सेंटर की बाबत 2014 एवम 2018 में राज्य सरकारों को लिखे गए पत्र की बाबत हलफनामा दिया था। फिर कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि प्रदेश में 35 अस्थाई डिटेंशन सेंटर है। क्या केंद्र और कर्नाटक सरकार ने न्यायालय में झूठा हलफनामा दिया?

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