कोबरा झुकता है तो डँसता है: बी. बी. रंजन

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कोबरा झुकता है तो डँसता है: बी. बी. रंजन 

    आज वीपी सिंह के आरक्षण के मसले को झटकनेवाले लोग अपनी कामयाबी पर इठलाते हैं। सवर्णों को विदेशी कहा गया, ‘भूरा बाल’ , ‘मुठ्ठी भर लोग’  और पन्द्रह बनाम पचासी की घृणित राजनीति कर आपसी भाईचारा बिगाड़ा गया। घृणित राजनीति में जनाधार तलाशे गये। इन्हें मंचों से गालियाँ दीं गयीं और जयचन्दों ने तालियाँ बजायीं। सवर्णों को खुलेआम प्रेस कॉफ्रेन्स में औकात में रहने की चेतावनी दी गयी। सवर्ण पाँच सौ छिद्रों वाले गंजी और बनियान पहनते हैं, लेकिन उन्हें सामंत कहा जाता है। सवर्ण मनरेगा के मजदूरों से बदतर जिन्दगी जीते हैं, लेकिन उन्हें जमीन्दार कहा जाता है।

 

सवर्णों के अस्तित्व को मिटाने की साजिश

 

महादलित, पिछड़ा और सवर्ण, सबके सहयोग से लोकतंत्र स्थापित होना चाहिए

 

   आज कई मुख्यमंत्रियों की मुस्लिम आतंकवादियों की गिरफ्तारी पर बोलती बंद हो जाती है।  

  

स्वामी सहजानन्द सरस्वती ने जमीन्दारी—प्रथा का उन्मूलन किया। श्रीकृष्णबाबू ने देवघर के मंदिर में दलितों को प्रवेश दिया। चन्द्रशेखर आजाद ने हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसियन का नेतृत्व किया और शहादत दे दी। राजकुमार शुक्ला ने सर्वप्रथम चम्पारण में राष्ट्रपिता को आमंत्रित किया और आन्दोलन प्रारंभ हुआ। सरगणेशदत्त ने दलितों को दान दिया। आशय यह कि हिन्दुस्तान निष्पक्ष और निःस्वार्थ पारदर्शी राजनीति करनेवालों का है, 1857 की क्रांति के जनकों का है। आज वीपी सिंह के आरक्षण के मसले को झटकनेवाले लोग अपनी कामयाबी पर इठलाते हैं। सवर्णों को विदेशी कहा गया, ‘भूरा बाल’ , ‘मुठ्ठी भर लोग’  और पन्द्रह बनाम पचासी की घृणित राजनीति कर आपसी भाईचारा बिगाड़ा गया। घृणित राजनीति में जनाधार तलाशे गये। इन्हें मंचों से गालियाँ दीं गयीं और जयचन्दों ने तालियाँ बजायीं। सवर्णों को खुलेआम प्रेस कॉफ्रेन्स में औकात में रहने की चेतावनी दी गयी। सवर्ण पाँच सौ छिद्रों वाले गंजी और बनियान पहनते हैं, लेकिन उन्हें सामंत कहा जाता है। सवर्ण मनरेगा के मजदूरों से बदतर जिन्दगी जीते हैं, लेकिन उन्हें जमीन्दार कहा जाता है। सवर्ण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सवर्ण संयुक्त परिवार में औसत 1.41 एकड़ जमीन तक सिमट गये। सवर्ण आरक्षण के अधिकारी हैं, लेकिन उन्हें सम्पन्न कहा जाता है। उनकी जमीन बिकती है, पैसे के अभाव में उनके बच्चों की शिक्षा बंद हो जाती है, वे दवा के अभाव में बीमारी से काल—कवलित हो जाते हैं, लेकिन उन्हें बीपीएल से बाहर रखा जाता है। आज दुर्भाग्यवश पसमांदा और मुसलमान, दलित और महादलित, पिछड़ा और अतिपिछड़ा के रूप में समाज को विभाजित करनेवाले विभाजकों की चलती आ गयी है। आज कई राज्य आतंकवादियों की शरणस्थली बन गये हैं। आज कई मुख्यमंत्रियों की मुस्लिम आतंकवादियों की गिरफ्तारी पर बोलती बंद हो जाती है। आज देश की सुरक्षा के साथ मजाक करनेवालों के इर्द—गिर्द राजनीति घुमने लगी है। जयचन्द भी इस साजिश के समर्थक हैं। 

 

दामिनी पर दहलती दिल्ली पर बोलनेवाले नौबतपुर की महिला के साथ होनेवाले बलात्कार पर चुप हो जाते हैं। रोहित वरमूला और कुरमुढ़ी कांड पर दलित विलाप अलापनेवाले राजवल्लभ यादव की पीड़िता की जाति बताने से परहेज करते हैं। एम्स के पास अपनी आबरू बचाने के लिये महिला को आत्महत्या करनी पड़ती है।

           

संसदीय और विधानसभा चुनाव का मसला हो या  किसान नेता की नृशंस हत्या का, हर बार इनके बीच बैठे जयचन्द साजिशकर्ताओं के पक्ष में दिखे। हत्या में शामिल लोगों के खिलाफ हुई पुलिसिया खानापूर्ति से संतोषजनक नहीं है। इन्हें टारगेट कर पूरे चुनाव की पृष्ठभूमि बनाई जाती है और सजायाफ्ता के हाथों सत्ता चली जाती है। घोटालेबाजों की गिरफ्तारी को शहादत के रूप में प्रचारित किया जाता है। इनके अस्तित्व को मिटाने की साजिश चल रही है।इन्हें विखण्डित करने का कुचक्र चल रहा है। किन—किन घटनाओं को भूलें। हर एक अपमान हृदय को खोखला करता है। अन्य वर्गों के नेता बेबाकी के साथ अपनी माँगों को रखते हैं, लेकिन सवर्ण लोग कुर्सी की सुरक्षा और ठेकेदारी में व्यस्त हैं।
 

आज जाति के आधार पर खून की कीमत में फर्क किया जाता है। जातीय आधार पर बलात्कार की घटनाओं की गंभीरता निर्भर करती है। यह महिला सशक्तिकरण की सच्ची तस्वीर है।

 

            दामिनी पर दहलती दिल्ली पर बोलनेवाले नौबतपुर की महिला के साथ होनेवाले बलात्कार पर चुप हो जाते हैं। रोहित वरमूला और कुरमुढ़ी कांड पर दलित विलाप अलापनेवाले राजवल्लभ यादव की पीड़िता की जाति बताने से परहेज करते हैं। आरोपी बिहारशरीफ जेल में होली पर भोज आयोजित करता है। एम्स के पास अपनी आबरू बचाने के लिये महिला को आत्महत्या करनी पड़ती है। पटना के जिलाधिकारी कार्यालय के पास ही एक बालिका हवस की शिकार बनती है। होली के अवसर पर राजीव नगर में दिनदहाड़े पूरे परिवार की पिटाई कर पत्नी को हवस की शिकार बनाने की कोशिश होती है, चीख सुनकर मौके पर पहुँचे डीएसपी पति और एक दारोगा की पिटाई होती है। मंत्री और विधायक की जेल में शहाबुद्दीन से मुलाकात की तस्वीर छपती है। आज जाति के आधार पर खून की कीमत में फर्क किया जाता है। जातीय आधार पर बलात्कार की घटनाओं की गंभीरता निर्भर करती है। यह महिला सशक्तिकरण की सच्ची तस्वीर है। लेकिन हमारे जयचन्द को राजनैतिक माइलेज की उम्मीद है। 

 

नरसंहारों पर विराम दूरसंचार क्रांति,  केन्द्रीय सड़क निर्माण योजना और सवर्णों एवं महादलितों की सोच में बदलाव की परिणति है। रामविलास पासवान के बयान पर दलितों और सवर्णों ने इस विवाद में तीसरे पक्ष की संलिप्तता को समझा और स्थिति बदल गयी। आज दलित और सवर्ण शांति के समर्थक हैं। सरकार की सख्ती जब शहरों में दिनदहाड़े एके—47 लहराने वालों पर नहीं चली तो हम उसे उग्रवादी गतिविधियों पर विराम का श्रेय कैसे दे दें। हमारी माँ—बहनों की अस्मत की रक्षा में विफल सरकार हमारी जान की सुरक्षा कैसे कर सकती है।

 

            नरसंहारों पर विराम दूरसंचार क्रांति,  केन्द्रीय सड़क निर्माण योजना और सवर्णों एवं महादलितों की सोच में बदलाव की परिणति है। रामविलास पासवान के बयान पर दलितों और सवर्णों ने इस विवाद में तीसरे पक्ष की संलिप्तता को समझा और स्थिति बदल गयी। आज दलितों और सवर्णो के बच्चों ने निजी कम्पनी में नौकरी कर कुछ अचल संपत्ति बना ली है। संपत्ति से जुड़ाव उग्रवादी गतिविधियों और उग्रवादियों के शेल्टर पर विराम लगता है। आज दलित और सवर्ण शांति के समर्थक हैं। सरकार की सख्ती जब शहरों में दिनदहाड़े एके—47 लहराने वालों पर नहीं चली तो हम उसे उग्रवादी गतिविधियों पर विराम का श्रेय कैसे दे दें। हमारी माँ—बहनों की अस्मत की रक्षा में विफल सरकार हमारी जान की सुरक्षा कैसे कर सकती है। जातीय विद्वेष और धार्मिक उन्माद के जरिये चुनावी फिजाँ बनानेवालों से सामाजिक समरसता और सामाजिक न्याय की अपेक्षा बेमानी लगती है।

 

पिछड़ों और दलितों के हाथ में सत्ता का अर्थ सिर्फ लालू प्रसाद और पासवान या मांझी सरीखे लोग हैं. यही लोग हमेशा पिछड़े है, दलित हैं. दरअसल गरीबों के हाथ से सत्ता को दूर रखनेवाले यही लोग हैं

 

            फर्जी आरा मिल, फरार शिक्षक, फरार पशुचिकित्सक, बंद अस्पताल, अवैध नर्सिंग होम, सरेआम लूट, दिनदहाड़े हत्या, अनगिनत अत्याचार और रोज बलात्कार— यही है आपका उभरता बिहार। हर कदम पर जाति आधारित अन्याय— यही है आपका सामाजिक न्याय। नीचे से ऊपर भ्रष्टाचार— जीरो टोलरेन्स की सरकार।
आज दलितों और पिछड़ों के नाम पर धनबलियों को लाभ दिया जा रहा है. गरीब दलित और पिछड़े आज भी चाय और पान की दुकानों पर ही मिलेंगे. वास्तविक गरीबों को आरक्षण का लाभ न देकर संपन्न घराना आरक्षण का लाभ झटक लेता है. पिछड़ों और दलितों के हाथ में सत्ता का अर्थ सिर्फ लालू प्रसाद और पासवान या मांझी सरीखे लोग हैं. यही लोग हमेशा पिछड़े है, दलित हैं. दरअसल गरीबों के हाथ से सत्ता को दूर रखनेवाले यही लोग हैं,  गरीबी और पिछड़ेपन को जीवित रखने की जिम्मेदारी इन्ही लोगों की है. चुनाव के वक्त अवसरवादी लॉबी समय के साथ हर चाल चलता है, हर निवेदन करता है. कोबरा झुकता है तो डँसता है।

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