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कांग्रेस से हमेशा दूरी रखनेवाले पाटीदार अब भाजपा के लिए समस्या

Image result for गुजरात मोदी1980 के दशक में  तत्कालीन मुख्यमंत्री माधव सिंह सोलंकी ने क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुसलमानों को मिलाकर खाम नामक एक मज़बूत सामाजिक गठजोड़ बनाया था। इस गठजोड़ से पाटीदारों को दूर रखा गया था और प्रारम्भ से ही कांग्रेस से एक हद तक दूरी बनाकर चलनेवाले पाटीदार खाम के गठन के बाद कांग्रेस के खिलाफ ज्यादा मजबूती से खड़े हो गए।

गुजरात चुनाव में 12 फ़ीसदी पाटीदार मतदाता भाजपा की जीत के लिए अहम रहे हैं। भाजपा माधव सिंह सोलंकी के काल में हुए जातीय और सांप्रदायिक दंगों को याद करा रही है। सामाजिक अशांति से व्यापारी वर्ग नाराज़ होता है। भाजपा किसानों के बीच बाढ़ से फसलों को नुकसान, नक़दी फसलों का सही दाम मिलने में परेशानी, फसल बीना के भुगतान में परेशानी और जीएसटी के के बुरे प्रभाव की आशंका से नाराज किसानों को साधने में लगी है।भाजपा किसानों के बीच पैदा हुए अविश्वास और नाराज़गी को दूर करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने किसानों के कर्ज़ माफी का एलान किया है।

भाजपा ने 1995 में केशुभाई पटेल को गुजराते का मुख्यमंत्री बनाया और तब से पटेल उसके कट्टर समर्थक बन गए। नरेन्द्र मोदी ने जब कुर्सी संभाली तो अपनी जाति का बार- बार नाम लिया और पटेल कुछ निराश हुए। 2012 के विधानसभा चुनाव में जनाधार बढाने की कोशिश में भाजपा ने अन्य पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश की और पटेल फिर पटेल मायूस हुए। कालांतर में उंके बीच आरक्षण की मांग उठी और हार्दिक पटेल ने इस भावना को जगाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज  हार्दिक को युवाओं का खुला समर्थन है। और 2017 के चुनाव में हार्दिक पटेल एक महत्त्वपूर्ण पहलू हैं। अल्पेश ठाकोर , जिग्नेश मेवाणी और हार्दिक के बीच पारस्परिक जातिगत विरोध है। अल्पेश पिछड़ी जाति से हैं, मेवाणी दलित हैं, हार्दिक पाटीदार हैं। पटेल इन दोनों जातियों से दूरी बनाए रखना चाहते हैं। दक्षिणी गुजरात के ज्यादातर पाटीदार अभी भी भाजपा के साथ हैं।

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