वित्तीय

लगातार मरते कृषक, आज पेश होगा बजट: बी बी रंजन

कल सदन में वित्त मंत्री पेश करेंगे देश का बजट। रियायत की आस में आशान्वित हैं लोग। बजट बढ़ता जा रहा है, लेकिन ट्रेन लेट चलती है।
लोगों को रोजमर्रा की वस्तुओं के मूल्यों में गिरावट की चाह है। किसान अपने अनाज की लाभकारी कीमत चाहते हैं। लागत से डेढ़ गुना ज्याफ कीमत की उनकी पुरानी मांग है। देश की 48.5 फीसदी आबादी किसान है और जीडीपी का 19 प्रतिशत हिस्सा कृषि का है। लेकिन, किसान हर बजट के बाद मौ की गाल में गाल में समाते रहे हैं। कभी कीटनाशक से, कभी कर्ज से ऑड कभी अकाल से उनकी मौत होते रही है। उनके बच्चे कृषि छोड़कर दरबान और चौकीदार बन गए, कारखानों में मजदूर बन गए।
लघु उद्योगों को सस्ते कर्ज की जरूरत है। सिक्योरिटी सेक्टर को उद्योग का दर्जा चाहिए। लोग आयकर की सीमा बढ़ाये जाने की घोषणा की प्रतीक्षा कर रहे हैँ। शिक्षा के क्षेत्र मेम गिरावट है। स्वास्थ्य सुविधा नदारद है। ट्रेनों का परिचालन अनियमित है, दुर्घटना की फ़ेहरिस्त लंबी है।

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