राजनीति

कर्नाटक: सरकार बना सकती है भाजपा

त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में देवेगौड़ा की पसंद होगी भाजपा

कर्नाटक: त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में भाजपा देवेगौड़ा की पहली पसंद होगी। कांग्रेस दलित मल्लिकार्जुन खड़के को सीएम बनाना चाहेगी, इसलिए सिद्धारमैया के बोल बदल गए हैं। चुनावोपरांत देवेगौड़ा रियल हीरो की भूमिका में हो सकते हैं: बी बी रंजन

गुजरात को भाजपा ने कर्नाटक में दुहराया है। जेडीएस और बसपा कई मामलों की वजह से भाजपा के निर्देशों का गुमनाम पालन करती दिखी है। कांग्रेस सिद्धारमैया को सीएम चेहरा घोषित कर चुकी है। सिद्धारमैया चुनाव के बाद मुख्यमंत्री के निर्धारण की बात करते रहे हैं। अब सिद्धारमैया के बोल बदल गए हैं। उन्होंने सीएम की दावेदारी पर असमझौतावादी रुख दिखलाया है।

देवेगौड़ा अपने पुत्र कुमारस्वामी देवेगौड़ा को सीएम बनाने को लेकर खासे बेचैन रहे हैं। सिद्धारमैया जेडीएस छोड़कर कांग्रेस में आये थे, इसलिए देवेगौड़ा पिता-पुत्र को उनके नाम पर विरोध करने का औचित्य है। मल्लिकार्जुन खड़के के नाम पर सिद्धारमैया के मुखर विरोध से कांग्रेस बैकफुट पर होगी और देवेगौड़ा की भाजपा की ओर शिफ्ट करने का मौका मिलेगा। प्रायोजित रणनीति के तहत मायावती ने लोकसभा चुनाव में एकजुटता बनाने के नाम पर कर्नाटक में दलित मुख्यमंत्री का राग छेड़ दिया है। अभी किसी भी कांग्रेस शासित प्रदेश में दलित मुख्यमंत्री नहीं है। बढ़ती दलित सक्रियता से आज सारी पार्टियां दलितों की गोलबंदी की कोशिश कर रहीं हैं। कांग्रेस लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मल्लिकार्जुन खड़के को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाना चाहेगी।

आज कर्नाटक में भारी मतदान के बीच चुनाव प्रायः संपन्न हो चुका है। दक्षिण में भी चुनाव का पैमाना बदल चुका है। बीस करोड़ की नकदी है तो दागियों को किसी भी दल से टिकट हो सकता है। कर्नाटक चुनाव की बात करें तो किसी भी दल की कोई आईडियोलॉजी नहीं है, किसी के पास विकास का कोई मॉडल नहीं है, किसी की पारदर्शी राजनीति नहीं है, किसी के जेहन में जनसरोकार की नीयत नहीं है, अंतरात्मा में आवाम के प्रति निष्ठा नहीं है। किसी तरह चुनाव जीतना है, साख कोई मुद्दा नहीं है और जिम्मेदारी का एहसास नहीं है। हमाम में सब नंगे हो चले हैं और सिर्फ सारे दलों को किसी तरह सत्ता पर काबिज होने की बेचैनी है। जाति, धर्म, उन्माद व अलगाव की पृष्ठभूमि पर सम्पन्न होनेवाले आज के चुनाव में देवेगौड़ा रियल हीरो बनकर उभर सकते हैं।

देवेगौड़ा पुत्र कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री का पद चाहिए। नरेंद्र मोदी की धुआँधार रैलियों के बाद भाजपा की स्थित सुधरी है। कांग्रेस अब भाजपा से आगे नहीं दिखती है। देवेगौड़ा अपना नफा-नुकसान देखकर राजनीतिक निर्णय लेना चाहेंगे, लेकिन कुछ ऐसे मसले हैं कि चुनावोपरांत त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में भाजपा के पक्ष में जाना उनकी मजबूरी होगी।

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