राजनीती

एनडीए के घटक दलों में खींचतान

नीतीश कुमार और रामलाल की बैठक के बाद भाजपा सहित इनडीए के घटक दलों के कई सांसदों में खलबली माचो है। टिकट कटने की संभावना से भयभीत सांसद राजद और कांग्रेस के संपर्क में आने लगे हैं।
भारतीय जनता पार्टी पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा, बेगूसराय से भोला सिंह और दरभंगा से कीर्ति आजाद का टिकट काटनेवाली है। राजीव प्रताप रूढ़ी और जनार्दन प्रसाद सिग्रीवाल में से किसी एक को टिकट सर वंचित करने की संभावनाबन रही है। बेगूसराय से गिरिराज सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव रजनीश कुमार तैयारी में हैं। पटना साहिब से रविशंकर प्रसाद और ऋतुराज सिन्हा अपनी संभावना तलाश रहे हैं। ऋतुराज सिन्हा राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा के पुत्र हैं। सिग्रीवाल की सीट महराजगंज और कीर्ति आजाद की सीट दरभंगा जनता दल यू के खाते मेम जा सकती है। लोजपा को रामविलास परिवार की पारिवारिक हाजीपुर, समस्तीपुर और जमुई सीटों का मिलना तय है, लेकिन नालंदा, वैशाली और मुंगेर सीट जदयू के खाते में जाने की चर्चा है। खगड़िया सीट भाजपा अपने पाले रखना चाहतो है। खगड़िया सांसद महबूब कैसर कांग्रेस में लौटने की तैयारी कर रहे हैं और सम्राट चौधरी खगड़िया से किस्मत आजमाना चाहते हैं। वैशाली के सांसद रामा सिंह पेशोपेश में हैं। मुंगेर से ललन सिंह चुनाव की तैयारी कर रहे हैं और लोजपा सूरजभान के लिए बेगूसराय पर दावा ठोकना चाहती है। भाजपा दो-तीन नई सीटों पर लोजपा को भेजना चाहती है।
दरअसल रामलाल ने नीतीश को महज राजद और काँग्रेस के प्रभाववाली आठ सीटों पर तैयारी करने की सलाह दी है, लेकिन जेडीयू अपने प्रभाववाली सीटों की मांग कर रहा है। इसलिए भाजपा अपने सहयोगी दलों के सीटों में कुछ परिवर्तन ला सकती है। जीतनराम मांझी अपने लिए गया, महाचंद्र प्रसाद सिंह के लिए महराजगंज और वृषण पटेल के लिए वैशाली की सीट पर दावा ठोक रहे हैं। उपेंद्र कुशवाहा के भी तीन संसद हैं, लेकिन इस बार उन्हें दो सीटों पर ही संतोष करना होगा। जहानाबाद के सांसद अरुण कुमार भाजपा की टिकट पर नवादा का रूख करना चाहते हैं। उषा विद्यार्थी का पोजीशन क्लियर तो नहीं है, लेकिन भाजपा सूत्रों की मानें तो उनकी दौर जहानाबाद के लिए है।

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