Education

इंजीनियरिंग में बेफिक्र जाएं प्रतिभावान

देश के प्रतिभावान इंजीनियरों की अभी भी उच्च वेतनमान पर नियुक्ति में परेशानी नहीं है। छात्र अनाड़ियों की बातों पर ध्यान न दें: बी बी रंजन

 

इंजीनियरिंग को तैयारी में लगे छात्र नादान लोगों की बातों में न आएं। अधिकांश अज्ञानी लोगों की स्तरीय कॉलेजों के छात्रों से मुलाकात ही नहीं होती। उन्हें सड़कों पर परेशान और घबराए स्तरहीन इंजीनियर्स ही मिलते हैं। सच पूछा जाए तो कुकुरमुत्ते की तरह उग आए निजी और स्तरहीन इंजीनियरिंग कॉलेजों में अयोग्य बच्चे भी अपना दाखिला करा लेते थे। कई अभिभावक भी दबाव देकर अपने बच्चों पर तकनीकी पढ़ाई का बोझ लाद देते हसीन। कई स्तरीय कॉलेजों में नामांकन के बाद भी अधिकांश छात्र पढ़ाई में पर्याप्त समय नही देते और कई विषयों में क्रॉस लगते हैं। सप्लीमेंट्री मेम शरीक होनेवाले, निम्न अंक एवं एक्स्ट्रा एक्टिविटी वाले छात्रों को प्लेसमेंट में परेशानी होती हैं। कैंपस सिलेक्शन में पर्सनालिटी भी महत्वपूर्ण फैक्टर है। प्लस टू की पढ़ाई के साथ ही करेंट बैच में अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला प्राप्त करनेवाले छात्रों के लिए प्लेसमेंट की मजबूत संभावना है। अपने दूसरे प्रयास में नामांकन पाने में सफल छात्र को नही प्लेसमेंट मदन महत्व मिलता है, लेकिन तीसरी उड़ान में मंजिल पानेवालों को परेशानी होती है। दसवीं और प्लस टू में प्राप्त उच्च अंक भी कैंपस में मायने रखते हैं। उचित और बेदाग तरीके से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करनेवाले सर्वगुण सम्पन्न छात्रों को आज नही काफी उच्च वेतनमान मिलता है।

यह सच है कि अयोग्य इंजीनियर्स कर लिए जॉब एक विकट समस्या है और कई ऐसे इंजीनियरों को 12 से 25 हजार रुपयों की नौकरी करनी पड़ती है, लेकिन अच्छे संस्थानों से अच्छी तरह योग्यता प्राप्त करनेवाले अभियंताओं की सैलरी लाखों और में है। प्रतिभावान छात्रों के लिए आज भी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पर्याप्त अवसर हैं, सुरक्षित कैरियर है।

असफल छात्रों और उनके अभिभावकों की हींन भावना से भी ऐसी धारणा बनी है।

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