आज का मोहम्मद बिन तुगलक

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मोहम्मद

बिन

तुगलक

 

*बी बी रंजन 

bbranjanresponse@gmail.com

 

बिहार में सुशासन और भ्रष्टाचार की चाहे जितनी भी बातें हवा में चलती रहे, सामाजिक न्याय के चाहे जितने भी नगाड़े बजते रहे, उभरता बिहार का चाहे जितना भी जुमला छनता रहे, सरकार बेवश है, तंत्र फेल्योर है, अफसरशाही निरंकुश है. नीतीश कुमार बेशक कई प्रयोगों में असफल रहे है. मोहम्मद बिन तुगलक की दिल्ली से दौलताबाद और दौलताबाद से दिल्ली के  मार्ग का कुमार ने जाने-अनजाने अनुसरण किया है. कभी बीडीओ और सीओ के पदों को एकल पद में बदला गया, फिर स्थिति यथावत बना दी गयी. कभी कार्यालयों के कार्यकाल को नौ बजे से छः बजे तक किया  गया, फिर आदेश को वापस करना पड़ा. सचिवालय के कार्यकाल को बदलना और फिर यथावत करने की मजबूरी सभी को याद है. छात्राओं को साईकिल देने के निमित कभी शराब की बिक्री को सही ठहराते हुए शराब की दुकानों का गली-गली आवंटन किया गया और फिर शराब पर  पूर्ण पाबंदी लगाकर वाहवाही लुटने की देशव्यापी मुहिम चलायी गयी. कभी लालू प्रसाद एंड कम्पनी को हटाने और हराने के लिए वोट मांगे गए, फिर लालू के साथ चुनाव लड़कर सरकार बनाई गयी. नीतीश ने कभी कांग्रेस नीतियों के खिलाफ आन्दोलन छेड़ा और फिर गलबहियां की धूम मची.

अस्पताल में सुव्यवस्थित उपचार के ढोल पीटे गए, लेकिन डॉक्टर्स मुख्यालय से दूर शहरों में निजी क्लिनिक चलाते रहे. दिनोदिन मरीजों का भरोसा टूटता गया और उनकी संख्या घटने लगी. सरकारी विद्यालयों के उद्धार की योजना बनती रही और  अयोग्य शिक्षकों की भरमार कर दी गयी. सरकारी विद्यालय खाली होते गए और निजी विद्यालयों की मनमर्जी चलने लगी. टॉपर घोटाला बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड की हकीकत से रुबरू करता है. निजी विद्यालयों पर शिकाजा कसने की खबरें आतीं रहीं, कोचिंग संस्थानों को कोचिंग एक्ट के अधीन लाकर मापदण्ड निर्धारित करने की बात चलती रही और टॉपर्स घोटाला का खेल भी चलता रहा, कोचिंग की मनमानी जारी रही.विजिलेंस की सक्रियता के बीच नियमों को ताक पर रखकर  कॉलेजों को मान्यता दी जाती रही. सुशासन के बीच कुशासन का खेल जमकर चलता रहा. कुकुरमुत्ते के तरह गैरमानक नर्सिंग होम्स पनपते गए और गरीबों का शोषण होता रहा. 

नारी सशक्तिकरण के नारों के बीच बलात्कार की घिनौनी घटनाएँ एक दिन नहीं रूकीं. परीक्षा में कड़ाई के दावों के बीच की छूट की खबरे अक्सर टेलीविज़न पर दिख जातीं हैं. भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का कमाल ऐसा है की कार्यालयों में रिश्वत के बगैर भुगतान के संचिका चलती, निदेशक की दलाली चपरासी करता है, जिला शिक्षा पदाधिकारी आदेशपाल से डरता है, स्कूल इंस्पेक्टर शिक्षक से भयभीत है.

सचिवालय के कार्यकाल में परिवर्तन का आदेश निरस्त्र करना पड़ा था. भ्रष्टाचार पर बोलना बंद करना पड़ा. शराबबंदी पर सख्ती की खबरें बेअसर होने लगीं हैं. शराब का अवैध निर्माण कई स्थानों पर हो रहा है. सीबीएसई से एक विद्यालय की मान्यता प्राप्त कर उसकी कई गैरकानूनी शाखाएं चल रहीं है. गैरनिबंधित नर्सिंग होम्स की बाढ़ है. कानून के राज के नाम पर हत्या, अपहरण, फिरौती, फर्जी निर्माण इकाई, जर्जर सड़कें और शिथिल प्रशासन के खुले दृष्टान्त हैं. 

गरीबों की सरकार के दावों के बीच इन्दिरा आवास में कमीशनखोरी और मनरेगा की जैसी-तैसी सर्वविदित है. सत्ता में शरीक तथाकथित पिछड़ी जातियों के द्वारा महादलितों का शोषण बदस्तूर जारी  है. 

जीतल का चलन और फिर उसके दुरूप्रयोग के फलस्वरूप निर्णय की वापसी के लिए मोहम्मद बिन तुगलक को याद किया जाता है. नीतीश कुमार का बदलता निर्णय एक बार फिर मोहम्मद बिन तुगलक की याद ताजा कर जाता है.

 

 

 

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