राजनीति

अलोकतांत्रिक तरीके से पैक्स का लोकतांत्रिक चुनाव

 

पैक्स चुनाव: एक वोट तो 2000 रुपये। कीमत निर्धारित हो गई है। चार दिनों की चाँदनी के बाद पाँच वर्षों का अँधियारा आपको अच्छा लगता है। उनका स्टार प्रचारक है धान का बिचौलिया,राइस मिल का मालिक, गाँव का दबंग जिसने 5 वर्षों तक निजी लाभ लिया है और उनके कारण आप पिछले कतार में धकिया दिए गए हैं। चुनाव गरीबों और कमजोरों को अपनी ताकत का एहसास कराता है, उन्हें उनका अधिकार देता है। आज उन दलालों के वोट की कीमत आपके वोट के बराबर है। इसलिए मतदान कीजिये, लेकिन हकों की बराबरी के लिए।

पैक्स चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ है। वंशवाद, स्थायी या लुटेरे चरित्रों से बचना जरूरी है। चाल, चरित्र और चेहरा के आधार पर सम्पन्न चुनाव किसानों के हित में होगा। पैसों के साथ टहलनेवालों के पक्ष में मतदान आपको अगले पाँच वर्षों तक टहलायेगा, लेकिन आप समझते कब हैं।

मैं जानता हूँ कि यह आलेख सार्थक है, लेकिन परिणाम निर्रथक है। जलेबी की मिठास, दारू की घूँट, जेब में चंद रुपये की पेशगी, धोती-कुर्ता-गमछा या एक-दो साड़ियों की भेंट पाँच वर्षों तक चले न चले, लेकिन लोकतंत्र के खरीददारों की 5 वर्षों की नीलामी तो चल जाएगी। चंद रुपयों से आपको चंद दिनों तक ललचाने वाला शख्स आपको ही पाँच वर्षों तक रोजाना दौड़ायेगा, ललचाएगा, क्योंकि आपकी कीमत तो अदा हो चुकी है। साथ में वह भी दौड़ेगा जिसने निष्पक्ष मतदान किया है, क्योंकि चुना गया व्यक्ति लुटेरा है।

आजीवन घोटालों में डूबा शख्स भी चुनावी समर में है। पैक्स अध्यक्ष के पद पर काबिज वर्षों पुराना घोटालेबाज भी पुनः मैदान में है, वंशवादी व्यक्तित्व भी किस्मत आजमाने से नहीं मान रहा। कुछ ऐसे लोग हैं जिनसे एक पद छीन गया तो उन्हें दूसरे की दरकार है, क्योंकि जनराशि की लूट से उनका खर्चा चलता है, उनकी हैकड़ी चलती है। बाकी मैदान खाली है, जीवन व्यर्थ है, जरिया शून्य है।

कई लोग पैक्स चुनाव के एवज में मुखिया के चुनाव का समझौता कर चुके हैं। कई लोगों ने जिला परिषद और सरपंच व पंचायत समिति से सीटों की अदला-बदली कर ली थी। कई ऐसे लोग प्रत्याशी बन गए हैं जिन्होंने सिर्फ अवैध तरीके से पूँजी अर्जित कर ली है और उनका अवैध तरीका हमेशा आम जनों को लूटने वाला रहा। फिर वैसे लोग आज प्रतिनिधि और सेवक बनने की कतार में आगे चल रहे हैं। बेबस या असामाजिक या बिकाऊ लोगों के साथ उनका प्रचार चल रहा है और चंद रुपयों का वितरण उनकी ताकत है। दरअसल उनकी नीयत पैक्स में लूट मचाने की नियति लानेवाली है।

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