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अब गुजरात में जादू और प्रबंधन का मतलब संसाधन और पैसा

गरीब प्रत्याशियों के हाथों से बाहर हो गयी

भारतीय राजनीति

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आजाद भारत के इतिहास पहली बार पचास हजार मतदान केंद्रों में घर-घर पहुंचने का जो रोडमैप बना है और यह लाव-लश्कर के साथ यात्रा की संभावित खर्च से रोंगटे खड़ा कर देता है। प्रमोद महाजन के फ़ॉर्मूले पर लड़ा जानेवाले गुजरात चुनाव में कार्यकर्ताओं तक पहुँचाने की मुहीम में पैसों का भरपूर खर्च आनेवाला है, लेकिन आसन्न चुनाव में भाजपा को मिलनेवाली जीत का सारा श्रेय नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता, मोदी की जादू और अमित शाह के प्रबंधन को जायेगा। भारी-भरकम खर्च और गलियारे में कार्यरत कार्यकर्ताओं और नेताओं की भारी तादाद से पटे बूथों की चर्चा तक नहीं होगी।

अब गुजरात में जादू और प्रबंधन का मतलब संसाधन और पैसा है इसलिए वहां कांग्रेस दिवालिया है। उसके पास पैसों और नेताओं की कमी है। राहुल के बाद मैदान खाली है और उम्मीदवारों को घर स खर्च करने की बारी तक आ गयी है। नकदी में विपक्ष नंगा है और सत्ता पक्ष के की तिजोरी से लोग बेखर हैं ।

Image result for democracy on sale in india electionलेकिन गुजरात में साधन-विहीन तीन नौजवानों के धमाल से भाजपा को अपनी पूरी सेना बुलानी पडी है। इन्हें मूर्ख बताने , गैर-हिन्दू घोधित करने और सेक्स सीडी के जरिये हासिये पर लाने की कोशिश प्रभावी नहीं हो रही इसलए घर-घर जाकर मतों के प्रबंधन पर जोर लगाया जा रहा है, खजाना खोलना पड़ा है। चुनाव अब सामान्य लोगों के हाथों से पूरी तरह निकल चुका है और यह लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।

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