अपराध पर जीरो टोलेरेंस की डुगडुगी बजानेवाले नीतीश कुमार का एक बदलता बयान आया है: बी. बी. रंजन.

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कभी भ्रष्टाचार और अपराध पर जीरो टोलेरेंस की डुगडुगी बजाकर सत्ता में आनेवाले नीतीश कुमार का एक बदला हुआ बयान आया है. उन्होंने मानव तस्करी के लिए गरीबी और अमीरी की असमान खाईं को जिम्मेदार माना है, लेकिन 27 वर्षों से इस खाईं को मिटाने की कोई पहल धरातल पर नहीं दिखती. इनके दल के विधायकों की संपत्ति तेजी से बढ़ती जा रही है. बेकारी की समस्या बरकारार है. हर विभाग में पद रिक्त है, लेकिन नियुक्त प्रक्रिया चुनावी लाभ के अनुसार होती है. प्रश्नपत्र लीक और मेधा घोटाला में सत्ता के सिपहसालारों की भूमिका सामने आयी है. कोर्ट के लगातार  निर्णयों के अनुसार बहरहाल भ्रष्टाचार के प्रतीक लालू प्रसाद के साथ इनका गठबंधन है. लालू प्रसाद के खिलाफ अकूत संपत्ति अर्जित करने के लगातार मामले उजागर हो रहे हैं. दलों में वंशवादी राजनीतिज्ञों की फ़ौज विराकमान है. अपराधी निर्णायक की भूमिका में हैं. कल कंकड़बाग में महिला से चेन लूटी गयी, ट्रेन से सफ़र करते एक युवक के ऊपर छिनतई के ऊदेश्य से प्रहार किया गया और उसकी मौत हो गयी. 
मुख्यमंत्री के बयान पर भरोसा करें तो ऐसी घटनाएँ असमानता को दूर करने के बाद ही रूकेंगी. सवाल है कि इसे रोकेगा कौन? 27 बर्षों से बड़े भाई-छोटे भाई की सत्ता है. इनके मंत्री, विधायक और इनसे जुड़े ठेकेदारों की संपत्ति में भारी इजाफा होता जा रहा है, जनता दिनोंदिन कंगाल बनती जा रही है. मानव तस्करी की शिकार अधिकाँश महिलायें गरीब या सामान्य परिवारों से आतीं हैं. मानव-तस्करी का सरगना और संरक्षक काफी संपन्न पृष्ठभूमि रखता है. कई मामलों में लड़कियों के साथ मंत्रियों, विधायकों और सत्ता समर्थित बड़े अधिकारियों के नाम जुड़ते हैं, लेकिन कार्रवाई की दिशा बदल जाती है. 
गरीबों के दो मसीहों की बिहार में 27 बर्षों से सत्ता है, लेकिन बाहुबली राजनेताओं की सुरक्षा में आज पुलिस लगी है. बिहार में कानून-व्यवस्था की लगातार गिरती स्थिति को कभी अन्य राज्यों से अपराध की तुलना कर छोटा बनाया जाता है, कभी आर्थिक असमानता को कारण बताकर पल्ला झाड़ लिया जाता है लोगों की बहु-बेटियां अंतर्राज्यीय बाजारों में नीलाम हो रहीं हैं, चकला घरों में रसूखदारों के लिए मनोरंजन का माध्यम बनतीं हैं, मजलिश में लोगों के मनोरंजन के लिए मुजरा बिखेरतीं हैं और बेवश माँ-बाप शिथिल कानून की भौंडी बातें सुनकर अपनी बेटी की वापसी की प्रतीक्षा में आसमान निहारता है, लोगों की तानें सुनता है, बिफरता है और इसे नियति मानकर संतोष कर लेता है. दूसरी ओर वंशवादियों, भ्रष्टाचारियों और बाहुबलियों के समर्थन से सरकार बनती रहेगी, लोग अपनी बेटियों को खोते रहेंगे, महिलाओं की अस्मत लुटती रहेगी, उनके गले के हार छिनते रहेंगे, ट्रेनों में मोबाइल से बात करनेवाले युवक छिनतई की फट्ठामार घटनाओं में जान गंवाते रहेंगे. जी हाँ! असमानता मिटेगी तब आप सुरक्षित हो जायेंगे. तब तक इंतज़ार कीजिये, क्योंकि ऐसा बयान देकर सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है. बहरहाल तथाकथित जनसेवकों, लोकसेवकों और कालेघन वालों की दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती संपत्ति से असमानता मिटने की उम्मीद मुझे तो कभी नहीं लगती, शायद आपको लगती होगी. आजादी के 70 और दोनों भाइयों की सत्तासीनता के 27 साल बीत गए, इन्हें अभी और कितना वक्त चाहिए, पता नहीं.

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