राजनीति

अपनी गलतियों से भागते प्रधान

    ** बी. बी. रंजन

अमेरिका और चीन के बीच कोई युद्ध नहीं होगा। यह अपनी नाकामियों को छुपाने और चुनावी लाभ पाने की मोदी की फिलॉस्फी पर आधारित ट्रंप नीति है। अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए डब्लयूएचओ, चीन और भारत को बलि का बकरा बना चुके ट्रंप अब ओबामा के खिलाफ भी बयानबाजी कर सकते हैं। नमो भी पाक, हिन्दू मुसलमान, तबलीगी और कांग्रेस के खिलाफ नैरेटिव बनाकर अपनी विफलताओं से पल्ला झाड़ते रहे हैं। बेशक तबलीगी दोषी हैं, लेकिन केंद्र ने भी भारी गलती की है: बी बी रंजन

हालिया राजनीति में विफल सरकारें अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए पड़ोसी देशों से तनातनी और अपने खिलाफ साजिश का नैरेटिव बनाकर सत्ता में पुनर्वापसी कर लेती हैं। आज भारत के नक्शे कदम पर अमेरिका आ गया है। ट्रंप कोरोना सहित कई मामलों में विफल हैं और उनका व्यक्तिगत व्यापार सर्वोपरि है। उन्होंने कोरोना को प्रारंभ में हल्के में लिया और कम्युनिटी ट्रांसमिशन के बाद सक्रियता बरती। फिर अमेरिका ने सघन जांच प्रारंभ किया। वहां अस्पताल बुनियादी सुविधाओं से लैश हैं। उनके चिकित्सक उच्च श्रेणी में शुमार हैं। उनकी कोरोना से मृत्य दर काफी कम है। सघन जांच का बड़ा लाभ भी होगा। देश की कोरोना से रिकवरी शीघ्र होगी, लेकिन बहरहाल उनकी विफलता जगजाहिर है। अमेरिका में मीडिया स्वतंत्र है और राष्ट्रपति से सीधे सवाल करता है।

ऐसी स्थिति में ट्रंप देशवासियों को दिखलाना चाहते हैं की अमेरिका अपनी जनता और देश के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। वह नमस्ते ट्रंप के आयोजक से जबर्दस्ती दवा ले सकता है, जर्मनी और भारत की सामानों से लदी जहाज मंगवा सकता है, चीन से युद्ध कर सकता है और डब्लयूएचओ को करारा जबाब दे सकता है। कुछ ही दिनों में ट्रंप ओबामा को इन सारी विफलताओं के लिए दोषी करार दे सकते हैं। ट्रंप कह सकते हैं कि ओबामा ने महामारी से निबटने का कोई प्लान नहीं बनाया और उसकी परिणति अब सामने आईं। सूत्रों की मानें तो ओबामा ने ट्रंप को वह प्लान भी दिया था, लेकिन ट्रंप ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया। बहरहाल अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए कई हुक्मरान किसी को भी बलि का बकरा बनाने लगे हैं। उन्हें हर हाल में सत्ता चाहिए।

भारत हर विफलता के लिए छह वर्षों की सत्ता के बाद भी कांग्रेस के मत्थे दोष मढ़कर खुद काम करिंदा बन जाती है। भारत कभी पाक और चीन के खिलाफ युद्ध की हालत बनाता है, लेकिन कुछ होता नहीं है। सत्ता आतंकवादियों से निबटने को हिन्दू – मुसलमान का हल्ला बनाती है, लेकिन ओवैसी और कई भड़काऊ मुल्लाओं से मिलीभगत की बातें चलती हैं।

सरकार जब विदेशों से लोगों की ढुलाई जैसी गलतियों के मामले में निरुत्तर होती है तो तबलीगी को टारगेट कर पल्ला झाड़ लेती है। तबलीगी दोषी हैं, लेकिन मूल खोजना भी जरूरी है। केंद्र निर्दोष नहीं है। आज अस्पतालों की बदहाली को छुपाने के लिए सभी राज्य और केंद्र सरकारें जांच की संख्या कम रखती हैं। अलबत्ता ताली और थाली पिटवा कर अपनी सक्रियता का हल्ला बनवा लेती हैं। भारत सफल वैदेशिक नीति का हल्ला बनाती है, लेकिन भारत के लिए चलनेवाली जहाज अमेरिका चली जाती है, नमस्ते ट्रंप के बाद हाईड्रॉक्सी दवा के लिए अविलंब अमेरिकी धमकी मिलती है और नमो सिर्फ ट्रंप की बधाई का नैरेटिव बनाकर खुश हो जाते हैं।

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