अध्यक्ष पद से बर्खातगी या अरूण की बल्ले—बल्ले

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अध्यक्ष पद से बर्खातगी

या अरूण की बल्ले—बल्ले

 

 अरुण के लिए प्रतीक्षारत निर्णय 

बी. बी.. रंजन


bbranjaresponse@gmail.com


 

अरूण कुमार की प्रधानमंत्री तक सीधी और सधी पहुँच की खबरें आतीं रहीं हैं। कई माह से कयास लगाये जा रहे थे कि कुमार भाजपा की ओर मुखातिब हो रहे हैं और भाजपा की सदस्यता चाहते हैैं। नवादा के चुनाव में अपनी जाति के विपरित धारा में जाकर चुनाव लड़ने के परिणाम से वे भली—भाँति अवगत हैं


कोईरी मतदाताओं के द्वारा पूरी तरह नकारे गये उपेन्द्र कुशवाहा की राजनैतिक पकड़ इन दिनों हासिये पर चली गयी है। बिहार विधानसभा चुनाव में कोईरी मतदाताओं ने महागठबंधन को अपनाया और उपेन्द्र कुशवाहा को पूरी तरह खारिज कर दिया। जातीय राजनीति से उभरनेवाले कुशवाहा की राजनैतिक हैसियत अब सिमट गयी है। कुर्था विधानसभा में रालोसपा की करारी हार ने उपेन्द्र कुशवाहा के अंदर वोट ट्रांसफर न कराने की क्षमता का खुलासा कर दिया था। कुर्था सीट पर उम्मीदवारी अरूण कुमार ने तय की थी। कुमार रामजतन सिन्हा जैसे कद्दावर नेता के पक्ष में गोलबंद भूमिहारों को तोड़ने में सफल रहे थे, लेकिन उपेन्द्र कुशवाहा की खमता पर सवालिया निशान पैदा हो गया। भाजपा के सहारे उनकी नैया अब अधिक दिनों तक नहीं चलनेवाली है। राजनीति के मंजे खिलाड़ी अरूण कुमार इस बात को भली— भाँति समझते हैं।
राजनीतिक सूत्रों कि मानें तो अरूण कुमार आगामी चुनाव में रालोसपा की उपयोगिता या जनाधार नहीं देखते। सूत्रों के अनुसार कुमार अब भूमिहार मतों को भी रालोसपा की ओर मोड़ पाने में स्वयं को अक्षम समझते हैं, क्योंकि भूमिहार मतदाता पूरी तरह भाजपा के साथ दिखते हैं। बेशक आज की तिथि में भूमिहार मतों पर अरूण कुमार की सर्वाधिक पकड़ है, लेकिन रालोसपा के साथ उनकी लम्बी पारी उनके राजनीतिक जीवन के लिए खतरनाक है।
अरूण कुमार की प्रधानमंत्री तक सीधी और सधी पहुँच की खबरें आतीं रहीं हैं। कई माह से कयास लगाये जा रहे थे कि कुमार भाजपा की ओर मुखातिब हो रहे हैं और भाजपा की सदस्यता चाहते हैैं। नवादा के चुनाव में अपनी जाति के विपरित धारा में जाकर चुनाव लड़ने के परिणाम से वे भली—भाँति अवगत हैं। राजनीति में कुमार ज्यादा रिस्क नहीं लेते रहे हैं। रालोसपा का साथ उनसे स्वजाजीय मतदाताओं को भी विमुख कर सकता है।
रालोसपा के अध्यक्ष पद से विदाई कुमार के राजनीतिक कैरियर के लिये शुभ संदेश हो सकता है। उगते सूर्य को प्रणाम करना ही सफल राजनीति है। राजनीति में स्थायित्व और सुरक्षा की दृष्टिकोण से अरूण कुमार पर दलगत कार्रवाई उन्हें आनंदित करता होगा। अरूण कुमार को इस निर्णय की लम्बे अवधि से प्रतीक्षा थी। उपेन्द्र कुशवाहा की राजनीति का चाहे जो हो, लेकिन फिलहाल अरूण कुमार की तो बल्ले—बल्ले।

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